Saturday, January 17, 2026

सगी बहन को बनाया सेक्स स्लेव


 पार्ट -1

रश्मि 20 साल की थी। पिछले 3 साल से 12 वीं क्लास में ही फेल हुए जा रही थी। वहीं उसका बड़ा भाई अमित जो सिर्फ 22 साल का ही था, वह ग्रेजुएशन भी कर चुका था और बैंक में अफ़सर भी बन चुका था। मम्मी पापा इसलिए भी परेशान थे कि 12 वीं फेल लड़की की शादी करनी मुश्किल थी। दरअसल रश्मि बेहद खूबसूरत होने के बाबजूद पढ़ाई लिखाई में कमजोर थी या फिर उसका पढ़ाई लिखाई में मन ही नही लगता था। इसके ठीक उलट अमित पढ़ाई लिखाई में हमेशा आगे रहता था और उसने ग्रेजुएशन के बाद बैंक का कम्पटीशन भी पास कर लिया और 22 साल में ही बैंक में अफ़सर भी बन गया था । रश्मि और अमित के पापा विनोद की किराने की दुकान थी और मम्मी आशा हाउसवाइफ थीं। मम्मी पापा को यह चिंता थी कि 12 वीं फेल लड़की से शादी कौन करेगा। एक दिन रात को जब सब मिलकर डिनर की टेबल पर बैठे हुए थे, अमित के पापा विनोद ने अमित को यह कहा: देखो बेटा, रश्मि 3 सालों से फेल होकर 12 वीं क्लास में ही अटकी हुई है। तुम अब इसकी पढ़ाई लिखाई की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेकर किसी तरह इसे ग्रेजुएशन तो पास करवा दो। इससे पहले कि अमित कुछ बोलता, उसकी मम्मी आशा ने भी रश्मि की तरफ देखते हुए कहा: आज से तुम्हारी पढ़ाई लिखाई अमित के जिम्मे है। अमित तुम रश्मि की पूरी सख्ती के साथ पढ़ाई करवाओ। अमित यह सब सुनकर बहुत खुश हो रहा था क्योंकि अभी तक रश्मि उसकी पकड़ से बाहर थी। सगी बहन होने के बाबजूद अमित रश्मि की सेक्सी फिगर और उसके खूबसूरत बदन पर एकदम फिदा था लेकिन उसे जिस मौके की तलाश थी वह उसे खुद ब खुद ही मिल गया था। मम्मी पापा की बात सुनकर अमित ने भी यह कहते हुए हामी भर दी: पापा दिन में तो मैं बैंक में होता हूँ। रात को डिनर के बाद मैं हर रोज रश्मि को 2 घण्टे पढ़ा दिया करूँगा। पापा ने अमित को खुली छूट देते हुए कहा: तुम इसे कब, कैसे और कहाँ पढ़ाओगे, वह सब तुम जानो। तुम्हे जैसे तैसे करके इसे ग्रेजुएशन करवा देनी है। अमित बोला : ठीक है, कल से हर रोज डिनर के बाद रश्मि मेरे कमरे में ट्यूशन पढ़ने आ जायेगी। मैं इसकी पढ़ाई लिखाई इतनी बढ़िया करवा दूंगा कि इस बार यह 12 वीं फेल नही, बल्कि 12 वीं पास होकर ही रहेगी।

अमित के मम्मी पापा और रश्मि ग्राउंड फ्लोर पर ही रहते थे। अमित का कमरा फर्स्ट फ्लोर पर था। अगले दिन डिनर की टेबल पर ही अमित ने रश्मि को रौबीले ढंग से हिदायत दे डाली: जल्द ही अपनी कॉपी और किताब लेकर मेरे कमरे में पहुंचो। हर रोज रात को 9 बजे से 11 बजे तक तुम्हारी पढ़ाई मैं करवाऊंगा।

दरअसल अमित रश्मि को पढ़ाई कराने के साथ साथ उसके साथ मस्ती करने के मूड में भी लग रहा था। रश्मि वैसे तो अमित को ज्यादा मुंह लगाती नही थी, लेकिन अब वह एक तरह से अमित के चंगुल में फंस चुकी थी। 

ठीक 9 बजे रश्मि अमित के कमरे में अपनी कॉपी किताबें लेकर पहुंच गई। रश्मि ने सफेद रंग का एक टॉप और लाल रंग का निक्कर पहना हुआ था जिसमे उसकी दूधिया जांघें और टांगे साफ दिख रही थीं। अमित का लंड रश्मि को देखते ही कड़क हो गया था। 

अमित भी इस समय एक टी शर्ट और निक्कर ही पहने हुए था जिसके अंदर उसका खड़ा लंड बाहर आने को मचल रहा था। अमित होशियार था और उसे मालूम था कि रश्मि को कैसे जाल में फंसाना है। 

अमित ने रश्मि को हिदायत देते हुए कहा: तुम्हे मैं मैथ, इंग्लिश और एकाउंट्स हफ्ते में 2-2 दिन पढ़ाऊंगा। इन्हीं 3 विषयों में तुम्हारे नम्बर कम आ रहे हैं। संडे वाले दिन इन तीनों विषयों का रिवीजन किया जाएगा। हर रोज तुम्हे होम वर्क मिलेगा। होम वर्क न करने पर या गलत करने पर तुम्हे सख्त सजा मिलेगी । इसलिए मस्ती छोड़कर अब पढ़ाई को लेकर सीरियस हो जाओ।चलो अब मैथ की किताब निकालो।

रश्मि ने मैथ की किताब निकालकर अमित को दे दी। अमित ने रश्मि को समझा समझाकर एक चेप्टर के 3 सवाल हल करवा दिए और फिर कहा: अगर कुछ समझ नही आया हो तो दुबारा पूंछ सकती हो। रश्मि बोली : सब समझ आ गया है।

अमित ने बिना किसी देरी के रश्मि से कहा: यह पांचवा सवाल करके दिखाओ। अभी 10 बजे हैं। तुम्हारे पास इस सवाल को हल करने के लिए 15 मिनट हैं। अब शुरू हो जाओ। 

रश्मि मैथ का सवाल करने में लग गयी और अमित अपने मोबाइल में कुछ पोर्न क्लिप देखने लगा। 15 मिनट बाद जब अमित ने पूछा: कर लिया सवाल ? लाओ दिखाओ। 

रश्मि टेंशन में थी।वह सवाल अभी तक कर ही नहीं पाई थी। 

रश्मि बहुत सहमी सहमी सी बोली : सवाल तो नही हुआ। बहुत मुश्किल लग रहा है। थोड़ा समय और लगेगा।

अमित का लंड तो पहले ही बेकाबू हुए जा रहा था। वह इस हाथ आये सुनहरे मौके को भला कहाँ छोड़ने वाला था। वह कड़क और रौबीली आवाज़ में रश्मि से बोला : खड़ी हो जा। अब तुझे सख्त सजा मिलेगी।

रश्मि सहमकर खड़ी हो गई। 

अमित उसकी तरफ देखकर बोला: आज पहली बार है इसलिए आसान सज़ा दे रहा हूँ। चल अपनी शर्ट और निक्कर उतार और कान पकड़कर गिनती करते हुए 100 उठक बैठक लगा।

रश्मि को काटो तो खून नही। उसे सपने में भी यह उम्मीद नही थी कि उसका भाई उसे इस तरह की सज़ा देने की सोच भी सकता है वह भी उसके कपड़े उतरवाकर।

रश्मि गिड़गिड़ाते हुए बोली : प्लीज़ मेरे कपड़े मत उत्तरवाओ। 

अमित हंसते हुए बोला: जल्दी कर। ज्यादा नखरे दिखाएगी तो बिल्कुल नंगा करके उठक बैठक लगवाऊंगा। 


कोई और रास्ता न देख, मजबूर होकर रश्मि ने अपनी शर्ट और निक्कर उतार दिया। अब उसके खूबसूरत दूधिया बदन पर सिर्फ सफेद रंग की ब्रा और पैंटी ही बची थी। 

अमित उसकी सेक्सी फिगर वह भी बिना कपड़ों के, पहली बार देख रहा था। उसकी हिम्मत अब बढ़ चुकी थी। वह रश्मि से बोला: इधर मेरे पास मेरी टाँगों के बीच मे खड़ी होकर उठक बैठक लगा। 

रश्मि समझ गयी थी कि अमित उसके साथ बदमाशी कर रहा है लेकिन वह विवश थी। अमित सोफे पर बैठा था। उसने अपनी टांगे फैलाकर रश्मि के लिए जगह बना दी और रश्मि शर्म और जलालत की वजह से आँखे बंद करके उठक बैठक लगाने लगी।

जैसे ही रश्मि ने कान पकड़कर उठक बैठक लगाना शुरू किया, वैसे ही अमित ने अपने मोबाइल में उसकी उठक बैठक का वीडियो बनाना शुरू कर दिया। रश्मि बिना गिनती बोले उठक बैठक लगाए जा रही थी। जब कुछ देर तक रश्मि बिना किये उठक बैठक लगा चुकी तो अमित उससे बोला: गिनती बोले बिना उठक बैठक काउंट नही होगी, यह मैंने पहले ही बताया था। अब 1 से शुरू करो और 100 उठक बैठक लगाओ। रश्मि फिर से गिड़गिड़ाने लगी : भैया यह सजा बहुत ज्यादा सख्त है। प्लीज़ कुछ और आसान सज़ा दे दो।

अमित समझ गया था कि अब रश्मि उसके चंगुल में पूरी तरह फंस चुकी है। रश्मि की चिकनी दूधिया जांघों पर हाथ फिराते हुए अमित उससे पूछने लगा: आसान सजा चाहिए ? 

रश्मि बड़ी उम्मीद से बोली : हाँ भैया

अमित : ठीक है। नीचे घुटनों के बल बैठ और मेरा लंड अपने मुंह मे लेकर इसे चूस।

रश्मि : मैं आपकी छोटी बहन हूँ । यह कैसे कर सकती हूँ। प्लीज़ ऐसा मत करो मेरे साथ।

अमित : ठीक है तो फिर कान पकड़कर 100 उठक बैठक लगा और गिनती भी करती जा। नही तो वह कर जो मैं कह रहा हूँ।

कोई और रास्ता न देख रश्मि अमित के सामने घुटनों के बल बैठ गयी। अमित अब तक अपना निक्कर उतार चुका था। अमित ने अपने खड़े हो चुके लंड को काफी देर तक रश्मि के गालों और होंठो पर फिराया और फिर उसे रश्मि के होंठों पर टिकाते हुए बोला: चल मुह खोल और इसे अंदर लेकर चूस। 

रश्मि ने अमित के लंड को लेकर जैसे ही

चूसना शुरू किया अमित उसका भी वीडियो मोबाइल में बनाने लगा। अमित का इरादा यही था कि इन्हीं वीडियो के बल पर वह रश्मि को हमेशा ब्लैकमेल करके अपने इशारों पर नचाता रहेगा। 

रश्मि अमित का लंड चूस रही थी लेकिन फिर भी अमित बीच बीच मे उसके मखमली गालों पर हल्के हल्के चपत लगाते हुए उसे कह रहा था: ठीक से चूसो। अपनी जीभ को इस पर इस तरह घुमाओ जैसे इसकी मालिश कर रही हो। रश्मि ने अपनी जीभ को उसके लंड पर उसी तरह घुमाना शुरू कर दिया जैसा कि वह चाहता था। कुछ ही देर में अमित अपने क्लाइमेक्स पर आ गया और उसने अपने वीर्य रस की पिचकारी रश्मि के मुह में छोड़ते हुए उससे कहा: इसे पी जा। एक भी बूंद बाहर गिरी तो और सज़ा मिलेगी। 
रश्मि जब अमित का लंड चूसकर उसका सारा वीर्य रस पी चुकी तो अमित ने उसे फिर से हुक्म दिया: यह गीला हो गया है। इसे अपनी जीभ से चाटकर साफ भी कर।
रात के पौने ग्यारह बज चुके थे। अमित ने अब रश्मि से कहा: चल अब अपने कपड़े पहन लें और अपनी मैथ की बुक दुबारा से लेकर मेरे पास आ। 
रश्मि मैथ की बुक लेकर अमित के पास आ गयी तो उसने वही सवाल जो रश्मि नही कर पाई थी, उसे नोट बुक पर हल करके समझाया और यह भी कहा कि इस चैप्टर के बाकी के बचे 5 सवाल हल करके कल होम वर्क में लेकर आने हैं। अगर होम वर्क नही किया या सवाल गलत किये तो फिर से सजा मिलेगी।रश्मि घबराई और डरी हुई अपनी किताब और नोट बुक लेकर वहाँ से ऐसे निकली मानो अपने भाई के कमरे से नहीं, बल्कि किसी जेलखाने से निकल कर आ रही हो।

अगले दिन रात को ठीक 9 बजे रश्मि फिर से अमित के कमरे में पहुंच गई। अमित ने बिना कोई समय बर्बाद किये रश्मि से कहा: कल जो होम वर्क दिया था, उसे चेक कराओ।

रश्मि ने अपनी नोट बुक निकाल कर अमित के हाथ मे दे दी। अमित ने कुछ देर तक नोट बुक में उसके होम वर्क को देखा और बोला: 5 सवालों में से तुमने सिर्फ एक सवाल ही ठीक से किया है। बाकी सब गलत हैं। 

रश्मि तो पहले ही बहुत सहमी हुई थी। वह डरी हुई अमित की तरफ देखने लगी। रश्मि के हाव भाव देखकर अमित का लंड एकदम खड़ा हो चुका था। रश्मि ने आज भी शर्ट और निक्कर ही पहना हुआ था जिसमे उसकी दूधिया संगमरमरी जांघें साफ दिख रही थीं। अमित लेकिन जल्दी में नही था। वह रश्मि से बोला: तुम्हारे 4 सवाल गलत हैं। उसके लिए तुम्हे सज़ा बाद में मिलेगी। अभी मैं दुबारा से इन्ही 4 सवालों को समझा समझा कर हल करवाऊंगा। उस पर ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि यह सवाल समझ मे आने पर ही आगे का चैप्टर शुरू हो सकता है। इसके बाद अगले एक घण्टे में अमित ने चारों सवाल समझाकर हल करवा दिए। अगले चैप्टर को समझाकर उसका भी एक सवाल हल करके बता दिया और उस चैप्टर के बाकी बचे चार सवालों को कल के होम वर्क के लिए रश्मि को दे दिया। 

यह सब करते करते 10 बज गए तो अमित बोला: अब पनिशमेंट टाइम शुरू होता है। चलो मेरे पास आकर खड़ी हो जाओ। रश्मि अमित की दोनों टाँगों के बीच मे जाकर खड़ी हो गयी। 

अमित अपने निक्कर में कैद लंड पर हाथ फिराते हुए रश्मि से बोला: चल अपने सारे कपड़े उतार । आज तुझे ऐसी सज़ा मिलेगी कि कल से तेरे सारे सवाल ठीक होने लगेंगे। अमित के हाथ मे आज एक बेंत भी था।

डरी सहमी रश्मि ने फटाफट अपनी शर्ट और निक्कर उतार दिए। 
अमित की हिम्मत अब बढ़ चुकी थी। वह मुस्कराता हुआ बोला: ब्रा और अंडरवियर भी उतार। बिल्कुल नंगी हो जा।

पार्ट-2

रश्मि हाथ जोड़कर अमित के आगे गिड़गिड़ाने लगी: भैया बिल्कुल नंगा मत करो प्लीज़। बहुत शर्म आ रही है। 

अमित : जल्दी कर । मेरा समय बर्बाद मत कर । नंगी नही हुई तो तुझे ऐसी ही हालत में ऊपर छत पर ले जाऊंगा।

अमित की धमकी सुनकर रश्मि ने अपनी ब्रा और अंडरवियर भी उतार दिए और अपने एक हाथ से अपने स्तनों को और दूसरे हाथ से अपनी योनि को ढकने की कोशिश करने लगी। अमित ने अब एक सीक्रेट कैमरा कमरे में फिट कर रखा था जो इस सब एक्टिविटी को रिकॉर्ड कर रहा था।

अमित : अपने दोनों हाथ ऊपर उठा और गोल गोल घूमकर अपना खूबसूरत बदन दिखा।

रश्मि हाथ ऊपर करके अपने बदन को गोल गोल घुमाकर उसकी नुमायश करने लगी। अमित उसके बदन पर अपना हाथ फेर फेर कर पूरी मौज़ मस्ती कर रहा था। 


रश्मि के पूरे बदन को दबाने सहलाने के बाद अमित उससे बोला: अब तेरा पनिशमेंट शुरू होगा। नीचे घुटनों के बल बैठ।

रश्मि को लगा कि उसे अब फिर से अमित का लंड अपने मुंह मे लेकर चूसना होगा। लेकिन अमित के इरादे कुछ और ही थे। अमित ने अपने हाथ मे एक बेंत पकड़ लिया और रश्मि से बोला: अपने चेहरे को मेरी गोद मे रख। इस बेंत से तेरे नितम्बों पर 50 बार स्पैकिंग की जाएगी। 

रश्मि ने अपना चेहरा अमित की गोद मे उसके अंडरवियर के ऊपर टिका दिया। अंडरवियर के अंदर अमित का लंड खड़ा हो चुका था। अमित ने रश्मि के चेहरे को पकड़कर उसे इस तरह से एडजस्ट कर दिया कि उसका चेहरा और होंठ उसके लंड पर ही टिके रहें। 

अब अमित ने रश्मि के नितम्बों पर बेंत मारना शुरू कर दिया। बेंत के पहले स्ट्रोक में ही रश्मि जोर से उछली और बोली: नही भैया प्लीज़ मेरी स्पैकिंग की सज़ा माफ कर दो। आप जो कहोगे मैं वह करने के लिए तैयार हूं। बस स्पैकिंग नहीं करो प्लीज़।

अमित ने किसी पोर्न फिल्म में यह सीन देखा था कि हीरो अपनी हीरोइन को इसी तरह बिठा कर स्पैकिंग कर रहा था और लड़की स्पैकिंग की वजह से जब जब उछलती थी तो उसका चेहरा हीरो के खड़े लंड पर रगड़ खाता था। अमित उस मजे को छोड़ना नही चाहता था। वह रश्मि से बोला: देख तेरी 50 बार स्पैकिंग तो होगी। मैं यह रियायत कर रहा हूँ कि बेंत के सिर्फ 10 स्ट्रोक लगाए जाएंगे और बाकी 40 स्ट्रोक मैं तेरे नितम्बों पर अपने हाथ से ही लगाऊंगा। इसके बाद अमित ने 9 स्ट्रोक रश्मि के नितंबों पर और लगाए और उसके उछलने का भरपूर मज़ा लिया। 

रश्मि को अब उसने उल्टा करके अपनी दोनों टाँगों पर लेटने का हुक्म दिया। रश्मि का चेहरा अब अमित की जांघों पर टिका हुआ था और उसके दोनों स्तन अमित के लंड पर टिके हुए थे। अमित ने रश्मि को इसी पोजीशन में पहले तो खूब दबाया सहलाया और फिर अपने हाथ से उसके नितम्बों की स्पैकिंग शुरू कर दी। 

हैंड स्पैकिंग से भी रश्मि अमित की गोद मे उछलने लगी। रश्मि जितना उछल रही थी, अमित को उतना ज्यादा मज़ा आ रहा था। 
40 बार हैंड स्पैकिंग करने के बाद अमित का लंड एकदम बेकाबू हो चुका था। अमित ने अपना लंड निकालकर रश्मि के मुंह मे डाल दिया और बोला: इसे अपनी जीभ से सहला सहला कर मालिश कर और इसके वीर्य रस को निकलते ही पी जाना । एक भी बूंद गिरी तो बेंत से स्पैकिंग होगी।



कुछ ही देर में अमित को क्लाइमैक्स आ गया और उसने अपने वीर्य रस की पिचकारी रश्मि के मुंह मे छोड़ दी। रश्मि एक आज्ञाकारी सेक्स स्लेव की तरह उसका सारा वीर्य निगल गयी। दो दिनों के अंदर ही रश्मि अमित की पक्की सेक्स स्लेव बन चुकी थी। अमित की मौज़ ही मौज़ थी क्योंकि उसने अब रश्मि को ब्लैकमेल करने के लिए सारी वीडियो रिकॉर्डिंग भी कर ली थी। रश्मि के साथ की जाने वाली सारी बदमाशियां उसने वीडियो में रिकॉर्ड कर ली थीं।

11 बजने ही वाले थे। अमित रश्मि से बोला: चल अब फटाफट अपने कपड़े पहन और नीचे जा।

रश्मि ने कपड़े पहने और अपनी नोट बुक वगैरा उठाकर अमित के कमरे से बाहर निकल गयी।

पार्ट-3

अगले दिन संडे होने की वजह से अमित देर तक बिस्तर पर ही लेटा सोता रहा । उसकी आंख तब खुली जब रश्मि ने आवाज़ लगाई: भैया उठो मैं आपके लिए बेड टी लेकर आई हूँ ।

अमित ने घड़ी की तरफ देखा तो सुबह के 9 बज रहे थे । रश्मि उसके सामने एकदम फ्रेश होकर आयी थी और चाय की ट्रे उसने सेंटर टेबल पर रख दी थी। संडे था इसलिए रश्मि की भी आज छुट्टी थी और वह भी घर पर ही थी। 

रश्मि चाय रखकर वापस जाने लगी तो अमित ने उसे रोक लिया: मेरी परमिशन के बिना कहाँ जा रही है ? लगता है कल रात की पनिशमेंट भूल गयी है। 
रश्मि एकदम सहमकर वहीं रुक गयी और अमित की ओर देखने लगी।

अमित ने कड़क आवाज़ में उससे कहा: दरवाज़ा अंदर से बंद करो।

रश्मि ने दरवाजा बंद कर दिया।

अमित बिस्तर पर अधलेटा होकर बैठा हुआ था। 

अमित : चाय लेकर मेरे पास आओ। 

रश्मि ने चाय का कप ट्रे में से उठाया और अमित के हाथ मे पकड़ा दिया।

अमित अब उससे बोला: जितनी देर में मैं चाय पी रहा हूँ तुम ऐसा करो बिस्तर पर आकर मेरा लंड अपने मुंह मे लेकर मुझे खुश करो। 

रश्मि : भैया सुबह सुबह यह सब मत करो प्लीज़।

अमित : चुप रह। मुझे मालूम है कि तेरे साथ कब क्या करना है। मेरी बात एक बार मे ही नही मानने की भी तुझे सज़ा मिलेगी। अब पहले सब कपड़े उतार और फिर मेरा लंड चूस।

बेबस होकर रश्मि ने अपने सारे कपड़े उतार दिए और बिस्तर पर बैठकर अमित के लंड को अपने मुंह मे लेकर चूसने लगी। अमित चाय खत्म करके कप को साइड टेबल पर रख चुका था। अब वह अपने मोबाइल में रश्मि के इस ब्लोजॉब की रिकॉर्डिंग करने लगा। 
रश्मि से लन्ड चुसवाने के बाद अमित उससे बोला: अब कपड़े पहन और यहाँ से भाग। आगे से हर छुट्टी वाले दिन मेरी चाय इसी तरह लेकर आना है और जब तक मेरी चाय खत्म न हो जाये, वही सब कुछ करना है जो आज किया है।

अमित की हिम्मत दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही थी। वह पोर्न फिल्मों में जो कुछ भी देखता था, वही सब कुछ वह अब रश्मि के साथ करना चाहता था। रश्मि उसके हाथ मे एक "सेक्स टॉय" की तरह थी जिसके साथ वह मनमाने ढंग से खेलना चाहता था।

दोपहर को लंच की टेबल पर  अमित रश्मि और मम्मी पापा के साथ ही बैठा हुआ था।

पापा अमित से पूछने लगे: बेटा रश्मि की पढ़ाई लिखाई तो ठीक चल रही है न ?

अमित : पापा, रश्मि की पढ़ाई की चिंता आप बिलकुल छोड़ दो।यह इस बार अच्छे मार्क्स के साथ 12 वीं पास करके कालेज जरूर जाएगी। 

अब मम्मी बोलने लगीं: बेटा हम लोग तो आज शाम को रतनपुर के लिए निकल रहे हैं। हमे एक हफ्ता लगेगा। कुछ जमीन जायदाद का झगड़ा है, वह निपटा कर ही आना है।

अमित की तो मानो लाटरी निकल आयी। वह बोला: हाँ हाँ, वह काम भी जरूरी है। आप इस बार उसे निपटाकर ही आना। रश्मि का चेहरा यह सुनकर एकदम सफेद पड़ गया कि एक हफ्ते तक उसे पूरी तरह अमित के इशारों पर नाचना पड़ेगा। लेकिन वह बेबस थी इसलिए उसने चुप रहना ही ठीक समझा। 

पापा ने अब रश्मि की तरफ देखते हुए कहा: सुबह शाम दोनों वक्त सुनीता मेड से काम करवाना तुम्हारी जिम्मेदारी है बेटा।

रश्मि बोली : पापा सुनीता को मैं देख लूँगी। आप चिंता मत करो।

मम्मी भी बोलने लगीं: मैंने सुनीता की माँ से बात कर ली है। एक हफ्ते वह पूरे समय यहीं रहेगी। ताकि तुम लोगों को कोई दिक्कत न हो।

अमित का दिमाग अब सुनीता की तरफ चल पड़ा। सुनीता दरअसल 18 साल की खूबसूरत लड़की थी। उसकी मम्मी विमला पहले मेड का काम करती थीं। पति के गुजर जाने के बाद विमला ने अपने साथ साथ अपनी दोनों लड़कियों को भी मेड के काम पर लगा दिया था। सुनीता वैसे सुबह शाम आकर घर की साफ सफाई, बर्तन धोने के साथ साथ नाश्ते, लंच और रात का खाना भी बनाती थी। अब एक हफ्ते वह यहीं रहकर सब काम करेगी। उसे नीचे का एक कमरा भी देने का बंदोबस्त भी कर दिया गया था।

अमित ने मम्मी की तरफ देखकर कहा: मम्मी हम लोग सब मैनेज कर लेंगे। आप टेंशन मत लो। आराम से अपना काम निपटा कर आओ।

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Part-4
शाम को 6 बजे मम्मी पापा अपनी गाड़ी से रतनपुर निकल गए। अब घर पर सुनीता, रश्मि और अमित रह गए थे।

अमित का ध्यान पहले कभी सुनीता की ओर नहीं गया था। लेकिन सलवार सूट पहने 18 साल की सुनीता आज उसे बेहद सेक्सी माल नज़र आ रही थी। उसका शैतानी दिमाग अब सुनीता को अपने जाल में फंसाने की तरकीब सोचने में लग गया था। अपने आफिस में मेल करके अमित ने एक हफ्ते की मेडिकल लीव के लिये अप्लाई कर दिया ताकि वह एक हफ्ते तक घर पर इन दोनों लड़कियों के साथ मौज़ मस्ती कर सके।


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मम्मी पापा के जाने के बाद अमित ने सुनीता से कहा: तुम जरा ऊपर जाकर मेरे कमरे के साथ लगे बाथरूम की सफाई करो। बाथरूम एकदम चमकना चाहिए। 

सुनीता को ऊपर भेजने के बाद अमित ने रश्मि से कहा: अपनी कापी किताब लेकर आओ और अपना होम वर्क चेक कराओ।

रश्मि अपनी नोट बुक वगैरा लेकर अमित के पास आ गयी। अमित होम वर्क में दिए गए उसके चारों सवाल चेक करने लगा। कुछ देर तक चेक करने के बाद अमित रश्मि से बोला: 2 सवाल सही हैं। 2 गलत हैं। पहले जो गलत सवाल हैं, उन्हें ध्यान देकर समझ लो। गलत सवालों की सज़ा बाद में मिलेगी। 

इसके बाद अमित ने दोनों गलत सवालों को समझा समझाकर हल करवाया। इसके बाद उसने इंग्लिश की बुक लेकर इंग्लिश ग्रामर का पाठ रश्मि को समझाया और उसका होम वर्क भी कल के लिए दे दिया। रश्मि इग्लिश की बुक पढ़ने में लगी हुई थी। अमित इस बीच उठकर सुनीता के कमरे में गया और उसे चेक करने लगा। सुनीता अभी तक ऊपर अमित के कमरे के बाथरूम की साफ सफाई कर रही थी।

शाम के 7 बज चुके थे। सुनीता सफाई करके नीचे वापस आ गयी थी और किचन में खाना बनाने की तैयारी में लग गयी थी।
अमित भी रश्मि को इंग्लिश पढ़ाने में लगा हुआ था। उसे पता था कि इंग्लिश ग्रामर में रश्मि बेहद कमजोर है और उसीकी वजह जे वह इंग्लिश में फेल होती आई है। इसलिए वह रश्मि को जोर लगाकर ग्रामर ही पढ़ा रहा था। 8 बजे जब डिनर बन गया तो रश्मि की क्लास अमित ने खत्म करके डिनर शुरू कर दिया। 

अमित ने सुनीता से भी कहा: तुम भी अपने कमरे में जाकर आराम से खाना खा लो। 

9 बजे तक जब सब लोग डिनर कर चुके तो अमित ने पूरे घर का चक्कर लगाकर घर के मेन गेट को अंदर से बंद किया और फिर ऊपर अपने कमरे की तरफ चला गया।

रश्मि अभी भी सहमी हुई थी कि उसकी क्लास तो आज पूरी हो गई लेकिन अमित बिना सज़ा दिए ऊपर कैसे चला गया।

कुछ ही देर में अमित नीचे आया और रश्मि से बोला: ऊपर कमरे में मेरे पर्स में से 1000 रुपये किसी ने लिए हैं। कहीं यह रुपये सुनीता ने तो नही चुराए हैं। 

इससे पहले की रश्मि कुछ बोलती, सुनीता अमित की आवाज़ सुनकर खुद अपने कमरे से बाहर आ गयी और बोली: नही साहब हम लोग गरीब हैं पर चोर नही हैं।

अमित सुनीता के कमरे में घुस गया और उसके बैग को चेक करने लगा। बैग में से 500 के दो नोट निकलते ही अमित सुनीता से कड़क आवाज़ में बोला: यह क्या है ? पुलिस को बुलाऊँ अब ? 

सुनीता बहुत डर गई थी। वह कहने लगी: साहब हमे नहीं मालूम यह रुपये इस बैग में कहाँ से आये। हमने चोरी नही की है।

अमित के जाल में सुनीता धीरे धीरे फंसती जा रही थी।

अमित सुनीता से बोला: ऊपर मेरे कमरे मे चल। तुझसे बाकी पूछताछ वहीं की जाएगी।

इस तरह अमित सुनीता को लेकर अपने कमरे में आ गया।

कमरे में आकर वह सोफे पर बैठ गया और फोन हाथ मे लेकर कहने लगा: बोल पुलिस को बुलाऊँ या फिर.....

सुनीता गिड़गिड़ाने लगी: नही साहब पुलिस को मत बुलाओ। आप जो कहेंगे हम वह सब करने के लिए तैयार हैं। हमने चोरी नही की है लेकिन फिर भी अगर आप को लगता है कि हमने चोरी की है तो हमे आप खुद सज़ा दे सकते हैं। पुलिस को मत बुलाओ। 

अमित का लन्ड एकदम कड़क हो चुका था क्योंकि सुनीता उसके जाल में पूरी तरह फंस चुकी थी।

अमित: तेरी तलाशी लेनी पड़ेगी अब। यह कहकर अमित सुनीता के पीछे चिपककर खड़ा हो गया और अपने दोनों हाथों से उसके बदन को दबाने सहलाने लगा। अमित अपने खड़े लन्ड को सुनीता के नितम्बों पर रगड़ रगड़ कर अपने हाथों से उसके कुर्ते में कैद स्तनों को दबाने सहलाने में लगा हुआ था।

सुनीता कुछ देर तक तो अमित की बदमाशी को बर्दाश्त करती रही फिर अचानक चिल्लाकर बोली: यह क्या बदमाशी कर रहे हैं साहब। 

अमित सुनीता को छोड़कर फिर से सोफे पर जाकर बैठ गया और सुनीता से बोला: अब तक तो मैं आराम से पेश आ रहा था। अब तुझे पता चलेगा कि बदमाशी कैसे की जाती है। चल अपने कपड़े उतारकर नंगी हो जा। जल्दी कर। वरना पुलिस यहां आएगी और तुझे थाने में ले जाकर नंगा करेगी। 

सुनीता सलवार कुर्ता पहने हुए थी। अमित के मुंह से पुलिस की बात सुनकर वह बहुत ज्यादा डर गई और झिझकते शर्माते हुए अपना कुर्ता उतारने लगी। कुर्ता उतारने पर उसकी लाल रंग की ब्रा नज़र आने लगी और उसमें कैद सुनीता के मस्त मम्मे भी अमित को दिखने लगे। 

अमित अपने निक्कर में कैद लंड पर हाथ फेरते फेरते कड़क आवाज़ में बोला: जल्दी कर सलवार भी खोल अपनी। तू तो एकदम मस्त माल लग रही है। 

सुनीता सलवार उतारने में हिचकिचाने लगी तो अमित फिर गुर्राया: लगता है पुलिस को फोन करना ही पड़ेगा।

पुलिस का नाम सुनते ही सुनीता ने फ़टाफ़ट अपनी सलवार भी खोलकर जमीन पर गिरा दी।

सुनीता की चिकनी जांघें और टांगें और उसकी सेक्सी फिगर अमित को बेकाबू किये दे रही थीं। इतनी जबर्दस्त और सेक्सी फिगर तो रश्मि की भी नही थी। 

अब सुनीता के सेक्सी बदन पर सिर्फ एक ब्रा और पैंटी बची हुई थी।

अमित ने कुछ देर तक सुनीता की मस्त फिगर को अपनी आंखों से देखा और फिर कड़क आवाज़ में बोला : सब कुछ उतारो और नंगी होकर मेरे पास आओ। जल्दी करो।

सुनीता को मजबूरन ब्रा और पैंटी भी उतारनी पड़ी। वह एकदम निर्वस्त्र हो चुकी थी और अपने एक हाथ से अपने स्तनों को और दूसरे हाथ से अपनी योनि को ढकने की नाकाम कोशिश कर रही थी। अमित लगातार अपने फ़ोन के कैमरे में निर्वस्त्र हो चुकी सुनीता का वीडियो बना रहा था। 

अमित अब पूरी मस्ती में आ चुका था: अपने दोनों हाथ ऊपर उठाओ और गोल गोल घूमती रहो। तेरी मस्त जवानी देखने के लिए और मेरे जैसे लौंडों की मौज़ मस्ती के लिए ही है। 

सुनीता की कातिल फिगर अमित के सामने थी। उसका लंड एकदम कड़क होकर बेकाबू हुए जा रहा था। सुनीता हाथ ऊपर उठाकर गोल गोल घूम रही थी और उसके बदन की इस नुमायश का अमित मोबाइल में वीडियो बनाये जा रहा था। 

कुछ देर बाद अमित ने अपना मोबाइल एक स्टैंड पर रख दिया और सुनीता से बोला: अब अपने हाथ उठाये उठाये मेरे नज़दीक आकर खड़ी हो।
सुनीता अपने दोनों हाथ ऊपर उठाकर अमित की टाँगों के बीच मे उसके बिल्कुल नज़दीक आकर खड़ी हो गयी। 
अमित उसके मस्त मम्मे दबाने सहलाने लगा। उसके स्तनों को जी भरकर दबाने सहलाने के बाद अमित का हाथ उसके मखमली बदन पर घूमता हुआ उसकी नाभि और फिर उसकी योनि पर आकर टिक गया। कुछ देर अपना हाथ अमित ने उसकी योनि पर फिराया और फिर उसकी केले जैसी चिकनी जांघों को सहलाता हुआ वह सुनीता से बोला : चल नीचे बैठ और मेरा लन्ड अपने मुंह मे लेकर चूस।

सुनीता कुछ समझी नहीं इसलिए वह चुपचाप खड़ी रही। अमित समझ गया कि लड़की एकदम अनछुई है और एकदम ताज़ा माल है। यह सोचकर अमित का लन्ड और भी कड़क हो गया कि सुनीता एकदम कच्ची कली है। 

सुनीता की योनि पर हाथ फेरते हुए अमित फिर से बोला: चल घुटनों के बल नीचे बैठ।

इस बार सुनीता घुटनों के बल नीचे बैठ गयी और अमित की तरफ देखने लगी।

अमित ने अपने लंड को बाहर निकाला और उसे सुनीता के होंठों पर रखता हुआ बोला: इसे अपने मुंह मे लेकर इस पर अपनी जीभ को गोल गोल घुमाओ। 

सुनीता घबराई हुई थी और अमित के चंगुल में बुरी तरह फंस चुकी थी। उसने अमित का लन्ड अपने मुंह मे ले लिया और उस पर अपनी जीभ फिराने लगी। 

सुनीता की मस्ती में अमित रश्मि के बारे में एकदम भूल चुका था। सुनीता हर लिहाज से रश्मि के मुकाबले में बहुत ज्यादा खूबसूरत और सेक्सी माल थी। सुनीता के मुख मैथुन का भी अमित के मोबाइल पर वीडियो बन रहा था क्योंकि उसने अपने मोबाइल को कमरे में एक स्टैंड पर इस तरह से पोजीशन कर दिया था जहाँ से साफ साफ वीडियो बन सके। सुनीता जाहिर तौर पर पहली बार लंड चूस रही थी क्योंकि अमित उसके गालों पर चपत मार मार कर बार बार उससे कह रहा था: ठीक से करो। तुम्हारी जीभ मेरे लंड पर लगातार घूमती रहनी चाहिए। 

अमित एकदम निरंकुश हो चुका था। उसे रोकने वाला कोई नही था। वह सुनीता को सेक्स टॉय की तरह इस्तेमाल कर रहा था। कुछ ही देर में अमित ने अपने वीर्य की पिचकारी सुनीता में मुंह मे छोड़ते हुए उससे कहा: यह सारा जूस पियो। इसकी एक बूंद भी बाहर गिरनी नही चाहिए। सुनीता से लंड चुसवाने के बाद अमित ने अपने लंड को सुनीता की जीभ से चटवा चटवा कर साफ भी करवाया और फिर उससे बोला: चल खड़ी हो और मेरे लिए एक गर्म कॉफी बनाकर ला। सुनीता उठकर अपने कपड़े पहनने लगी तो अमित ने उसे डांटते हुए कहा: तुझसे कपड़े पहनने के लिए किसने कहा? जब तक मेरी परमिशन न मिले तुझे इसी तरह निर्वस्त्र ही रहना है। चल ऐसे ही नीचे किचन में जा और मेरे लिए कॉफ़ी लेकर आ।

सुनीता बड़ी दुविधा में थी। नीचे रशिम के सामने वह नंगी हालात में कैसे जाएगी, वह यही सोचकर परेशान थी। अमित ने फिर से डांट लगाई तो वह उसी हालत में अपने स्तनों को और अपनी योनि को अपने हाथों से छिपाती हुई नीचे जाने लगी। अमित को मालूम था कि रश्मि खुद उसकी सेक्स स्लेव बन चुकी है, वह भला सुनीता के मामले में क्यों दखल देगी ? दरअसल अमित के पास इस समय दो दो खूबसूरत लड़कियाँ सेक्स स्लेव के तौर पर मौजूद थीं और उसे यह मालूम था कि वह दोनों ही पूरी तरह से उसके इशारों पर नाचने के लिए विवश थीं।

रात के 10 बज चुके थे। रश्मि डरी सहमी सी अपने कमरे में बैठी कल का होम वर्क कर रही थी। जैसे ही सुनीता नीचे किचन में घुसी, रश्मि कमरे से निकलकर किचन की तरफ देखने आ गयी कि इस समय सुनीता किचन में क्या कर रही है। 

रश्मि जैसे ही किचन में घुसी तो वहाँ सुनीता को पूरी तरह नंगा खड़ा देखकर वह समझ गयी कि अमित ने चोरी का आरोप लगाकर सुनीता को भी अपने जाल में फंसा लिया है। 




Thursday, July 24, 2025

कॉलेज प्रिंसिपल की अय्याशी की कहानियाँ








मिदनापुर जिले में अब तक लड़कियों के लिए कोई कालेज नही था और उन्हें पढ़ाई के लिए या तो दूसरे जिले में जाकर पढ़ना पड़ता था या फिर 12 वीं पास करके की बैठ जाना पड़ता था। शहर के बहुत बड़े सेठ धनपत राय का लड़का समीर जो अभी अभी विदेश से पढ़ाई पूरी करके वापस आया था, उसने अपने पिता को यह आईडिया दिया: पापा, हमे इस शहर में एक गर्ल्स कॉलेज खोल देना चाहिए। उसमे हमे बहुत कमाई होगी क्योंकि इस धंधे में हमारा कोई कम्पटीशन नही है। मैं उस कालेज का प्रिंसिपल बनने के लिए तैयार हूं। बाकी सारी व्यवस्था मैं कर लूंगा। आप सब मुझ पर छोड़ दो।

सेठ जी को अपने विदेश से पढ़कर लौटे 27 साल के बेटे की बात जँच गई और उन्होंने आनन फानन में अपने धन बल के जोर पर सेठ धनपत राय गर्ल्स डिग्री कॉलेज की स्थापना कर दी। कॉलेज में समीर खुद प्रिंसिपल बनकर निरंकुश होकर काम करने लगा। समीर बेहद अय्याश किस्म का लौंडा था और उसका गर्ल्स कॉलेज खोलने का आईडिया भी अपनी अय्याशी पूरी करने का एक जरिया मात्र था।

कॉलेज में उसने बेहद खूबसूरत लड़कियों को टीचर की पोस्ट पर रखकर उन सबके लिए भी ड्रेस कोड तय कर दिया। सभी टीचरों को ड्रेस कोड के हिसाब से ब्लैक कलर की टाइट ड्रेस में आना था। ड्रेस इस तरह की थी जिसमे सभी टीचरों की फिगर एकदम साफ दिखती रहे।

कॉलेज में जितनी भी लड़कियाँ पढ़ने के लिए आती थीं वे सभी 12 वीं पास होती थीं और लगभग 18 साल की होती थीं। उन सबके लिए भी समीर ने ड्रेस कोड तय कर दिया था। सभी लड़कियों को सफेद टाइट शर्ट और घुटनों से 2 इंच ऊपर तक की नीली स्कर्ट पहननी थी। यही नही, गर्ल्स स्टूडेंट को स्कर्ट के नीचे अंडरवियर और शर्ट के अंदर ब्रा भी सफेद रंग की ही पहननी थी।

समीर ने अपनी अय्याशी के लिए कॉलेज की स्टूडेंट्स के लिए बेहद सख्त नियम बना दिये थे: सभी लड़कियों के लिए जो नियम बनाये गए थे, उनकी लिस्ट कुछ इस प्रकार है:

1. सभी लड़कियाँ कॉलेज की बताई गई यूनिफार्म पहनकर ही कॉलेज आएंगी। कोई भी टीचर या प्रिंसिपल किसी भी लड़की की यूनिफार्म चेक कर सकता है। यूनिफार्म ठीक न होने पर प्रिंसिपल के पास जाकर लड़की को सज़ा लेनी होगी।

2. सभी लड़कियाँ ठीक 9 बजे सुबह को कॉलेज में दाखिल होकर अपनी इलेक्ट्रॉनिक अटेंडेंस दर्ज करेंगी। देर से आने वाली लड़कियों को प्रिंसिपल सर सज़ा देंगे।

3. जो लड़कियाँ अपना होम वर्क पूरा नही करेंगी, उन्हें भी प्रिंसिपल सर के पास जाकर सज़ा लेनी होगी।

4. हर महीने लड़कियों की लिखित परीक्षा ली जाएगी जिसमें कम से कम 60 प्रतिशत मार्क्स लाने जरूरी होंगे। जिनके मार्क्स 60% से कम होंगे उन लड़कियों को भी प्रिंसिपल सर के पास जाकर अपने लिए सज़ा की माँग करनी होगी।

5. कोई भी लड़की अगर अनुशासनहीनता करती हुई पाई गई, तो भी उसे प्रिंसिपल के पास जाकर सज़ा लेनी होगी।

समीर ने सारे नियम इस तरह से बनाये थे कि किसी भी टीचर के पास लड़कियों को सज़ा देने की कोई पावर नही थी। लड़कियां कुछ भी करें तो उसके लिए सज़ा सिर्फ समीर ही दे सकता था।

कॉलेज का पहला सेशन शुरू हो चुका था। पूरे जिले की लगभग 500 लड़कियों ने अलग अलग कोर्स के लिए कॉलेज में एडमिशन लिया था। समीर ने सभी क्लास रूम में सी सी टी वी कैमरे लगवा रखे थे और अपने प्रिंसिपल आफिस में बैठकर वह सभी क्लास रूम पर नज़र रखता था।

कॉलेज का आज पहला दिन था। टीचरों को समीर ने सख्त हिदायत दे रखी थी कि पहले दिन से ही नियमों का कड़ाई से पालन किया जाए और जो लड़की नियमों का उल्लंघन करती पाई जाए उसे सज़ा के लिए समीर के पास भेजा जाए।

10 बजे से ही समीर के आफिस के बाहर लड़कियों की लाइन लगनी शुरू हो गयी। समीर का लण्ड अब एकदम खड़ा हो चुका था जिसे वह अपने हाथों से एडजस्ट करते हुए सहला रहा था। 


पुलिस थाना बना अय्याशी का अड्डा


 Coming Soon....

Saturday, July 12, 2025

गाँव की अनपढ़ वाइफ बन गई सेक्स स्लेव


 

अजय की अभी अभी शहर के एक बड़े बैंक में अफसर की नौकरी लगी थी। कम्पटीशन पास करने पर उसे डायरेक्ट बैंक में अफसर बना दिया गया था। 

अजय देवपुरा गांव का रहने वाला था लेकिन बैंक की नौकरी के चलते वह शहर में ही आकर बैंक अफसर कॉलोनी में मिले फ्लैट में रहने लगा।

बैंक अफसर बनते ही उसके गांव में रह रहे मम्मी पापा वगैरा का उस पर जल्दी शादी करने के लिए दबाब पड़ने लगा। अजय चाहता था कि उसकी शादी शहर की किसी पढ़ी लिखी मॉडर्न लड़की से हो लेकिन उसके घर वाले गाँव की ही किसी लड़की से अजय की शादी कर देंना चाहते थे। 

अजय बैंक में ही काम कर रहे अपने एक दूसरे दोस्त विनय से इस बारे में चर्चा करने लगा।

विनय बोला: देख यार। मैं भी पास के लखनपुर गाँव से ही हूँ और मैंने शादी अपने माँ बाप की मर्ज़ी के अनुसार गाँव की ही एक लड़की से की है और मैं इस शादी से बहुत ज्यादा खुश हूं।

अजय बड़ा हैरान होकर उससे पूछने लगा: क्या बात कर रहा है? गाँव की अनपढ़ लड़की से शादी करके तू बहुत खुश कैसे है?

विनय : देख भाई। शादी किसलिए करते हैं हम ? लड़कों को शादी के बाद क्या चाहिए होता है?

अजय : शादी के बाद हमे एक पढ़ी लिखी खूबसूरत वाइफ चाहिए होती है।

विनय : देख भाई। पढ़ी लिखी वाइफ और गाँव की अनपढ़ वाइफ के अपने अपने फायदे नुकसान हैं। मुझे गाँव की अनपढ़ वाइफ में ज्यादा फायदे दिखे इसलिए मैंने उससे शादी कर ली।


अजय अभी भी हैरान होकर विनय की तरफ देख रहा था।

विनय उसकी हैरानी को दूर करने के लिए बोला: ऐसा कर। आज तू शाम को मेरे साथ मेरे घर चल। आज शाम का चाय नाश्ता मेरे घर पर कर और इसी बहाने मेरी वाइफ से भी तेरी मुलाकात हो जाएगी। तुझे यह भी समझ आ जायेगा कि गाँव की वाइफ में ऐसा क्या है जो शहर की पढ़ी लिखी वाइफ में कभी नही मिल सकता।

शाम तो बैंक बंद होने के बाद अजय को विनय अपने घर लेकर आ गया। उसकी शादी भी अभी हाल ही में लगभग 6 माह पहले ही हुई थी।

विनय अजय को लेकर ड्राइंग रूम में आ गया और उसे अपने साथ ही सोफे पर बिठाते हुए बोला: अब तू चुपचाप देखता जा कि गाँव की अनपढ़ लेकिन खूबसूरत वाइफ के क्या फायदे होते हैं।

विनय ने रौबीली आवाज़ में अपनी वाइफ को बुलाया: माधुरी 2 गिलास पानी लेकर आओ।



कुछ ही देर में विनय की वाइफ एक प्लेट में दो गिलास पानी के लेकर आ गयी। माधुरी बला की खूबसूरत थी और उसने एक टाइट मैक्सी पहनी हुई थी जिसमे उसकी मस्त फिगर साफ़ नज़र आ रही थी। 

अजय और विनय ने गिलास उठाकर पानी पी लिया तो माधुरी दोनों खाली गिलास उठाकर वापस जाने लगी लेकिन विनय ने अपनी वाइफ को रोक दिया और उसे उंगली के इशारे से बुलाते हुए कहा: इधर आओ मेरे पास।

माधुरी ने गिलास की प्लेट टेबल पर वापस रख दी और विनय के एकदम नज़दीक आकर खड़ी हो गई।

अजय का लण्ड उसकी पैंट में अब तक तनकर खड़ा हो चुका था लेकिन अभी असली ड्रामा बाकी था।

विनय : पानी पिलाने के बाद तुम्हे कुछ और भी काम करना होता है। तुम आज वह काम करना भूल गयी इसलिए अब तुम्हे सज़ा मिलेगी। चलो कान पकड़ो और 10 उठक बैठक लगाओ।

माधुरी ने अपने कान पकड़ लिए और उठक बैठक लगाने लगी।
जब 10 उठक बैठक लगा चुकी तो विनय ने फिर से माधुरी को रौबीली आवाज़ में आर्डर दिया: अब वह काम करो जिसके न करने की तुम्हे सज़ा मिली है।

अजय एकदम हैरान होकर इस सारे तमाशे को देख रहा था। उसने कभी सपने में भी नही सोचा था कि कोई वाइफ ऐसा भी कर सकती है जैसा माधुरी कर रही थी। लेकिन अब जो हो रहा था, उसे देखकर अजय और भी हैरान हो गया।

माधुरी विनय की दोनों टाँगों के पास घुटनों के बल बैठी उसके जूते उतार रही थी। जूते उतारने के बाद उसने विनय के मोजे भी उतारे। विनय ने अपने एक पैर को उठाकर उसे माधुरी के चेहरे पर रगड़ते हुए कहा: दुबारा यह गलती नही होनी चाहिए। चलो अब उठो और हम लोगों के लिए चाय लेकर आओ।

माधुरी वहाँ से चली गई तो विनय ने अजय की तरफ देखकर हंसते हुए कहा: अब बता, क्या शहर की पढ़ी लिखी वाइफ यह सब करेगी जो माधुरी कर रही है? इसे मैं 24 घण्टे अपने इशारों पर इसी तरह नचाता हूँ। यह वह सब करती है जो मैं इसे करने के लिए कहता हूँ। इसकी हालत एकदम"चल बैठ जा, बैठ गयी और खड़ी हो जा, खड़ी हो गई" वाली है। शहर की लड़की से यह सब करवाना नामुमकिन है।

अजय की हालत एकदम बेकाबू हो चली थी। उसका लण्ड उसकी पैंट में तनकर एकदम कड़क होकर खड़ा हो गया था। विनय अजय की इस हालत को अंदर ही अंदर अच्छी तरह समझ चुका था लेकिन अभी भी सरप्राइज बाकी था।


कुछ ही देर में माधुरी एक बड़ी सी ट्रे में चाय और नाश्ता लेकर आ गई। उसे देखते ही अजय एकदम हैरान होकर विनय की तरफ देखने लगा। उसका लण्ड अब पूरी तरह बेकाबू हो चला था। दरअसल माधुरी के बदन पर अब सिर्फ ब्रा और अंडरवियर ही था जिसमे उसका पूरा खूबसूरत बदन और फिगर एकदम साफ दिख रही थी।

विनय ने अजय की तरफ देखकर उसकी हैरानी को थोड़ा कम किया: भाई मैंने अपनी वाइफ को यह हिदायत दे रखी है कि शाम को जब भी मेरे लिए चाय लेकर आएगी उसे ऐसे ही कपड़ों में आना पड़ेगा वरना इसे बहुत सख्त सजा मिलती है। 

विनय ने माधुरी के हाथ से चाय की ट्रे पकड़े ली और उसकी तरफ देखकर बोला: चल अब जल्दी घोड़ी बनकर दिखा।

माधुरी अजय और विनय के सामने ही घोड़ी बनकर खड़ी हो गयी और विनय ने माधुरी की चिकनी पीठ पर चाय नाश्ते की ट्रे को रख दिया।

विनय जिस तरह से अपनी वाइफ के साथ अजय के सामने बदमाशी कर रहा था, अजय यह सोच सोचकर परेशान था कि यह अय्याश लौंडा अकेले में अपनी वाइफ के साथ क्या क्या करता होगा।

माधुरी के खूबसूरत जिस्म को टेबल की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था। दोनों दोस्त चाय नाश्ता करने में व्यस्त थे।

विनय बीच बीच मे माधुरी के नितंबों पर हाथ फिरा रहा था और अजय की तरफ देखकर हंसते हुए कह रहा था: बोल ऐसी वाइफ शहर में मिलेगी क्या?

अचानक विनय के फोन की घण्टी बज उठी और वह वहाँ से उठकर जाने लगा। जाते जाते वह अजय से बोला: बॉस का फोन आया है। लम्बी बात चलेगी। 10-15 मिनट भी लग सकते हैं। तुम तब तक अपनी चाय और नाश्ता फिनिश कर लेना।

अजय के सामने अब माधुरी का खूबसूरत जिस्म था जिसे उसने इस समय चाय की टेबल बनाकर रखा हुआ था। चाय पीते पीते अब अजय ने भी माधुरी के बदन पर हाथ फिराना शुरू कर दिया। जब अजय ने देखा कि माधुरी किसी तरह का विरोध नही कर रही है तो उसकी हिम्मत बढ़ने लगी। 

अजय ने अपने दाएं पैर को उठाकर उसके जूते की नोक को माधुरी के होंठों पर फिराते हुए कहा: इसे अपने मुंह मे लो।
जब माधुरी ने बिना किसी विरोध के अजय के जूते की नोक को अपने मुंह मे ले लिया तो अजय समझ गया कि लौंडिया एकदम काबू में है। उसने चाय नाश्ते की ट्रे को माधुरी की पीठ पर से हटाकर एक तरफ रख दिया और उससे रौबीली आवाज़ में बोल: चल घुटनों के बल मेरी जाँघों के बीच बैठ और मेरा लण्ड चूस।

माधुरी बिना किसी विरोध के अजय के आगे घुटनों के बल बैठकर उसके लन्ड को अपने मुंह मे लेकर चूसने लगी। जिस तरह से माधुरी उसका लण्ड चूस रही थी, उससे लग रहा था कि विनय ने उसे बहुत बढ़िया ट्रेनिंग दी थी। अजय ने कुछ ही देर में अपना वीर्य रस माधुरी के मुंह मे छोड़ते हुए कहा: इसे पी जा साली। एक बूँद भी ज़मीन पर गिरी तो तुझे सख्त सजा मिलेगी।

माधुरी अजय के लण्ड से निकले सारे वीर्य को पीने के बाद उसके गीले लण्ड को अपनी जीभ से चाट चाटकर साफ भी करने लगी।

अजय की मानों लाटरी निकल आयी थी। अब उसने तय कर लिया कि वह भी विनय की तरह किसी गाँव की अनपढ़ गँवार लेकिन खूबसूरत लौंडिया को ही अपनी वाइफ बनाएगा ताकि जिस तरह विनय अपनी अनपढ़ गँवार वाइफ को अपनी सेक्स स्लेव बनाकर मज़े ले रहा है, वह भी इसी तरह जिंदगी के मज़े लूट सके।

उस दिन अजय जब विनय से मिलकर वापस घर आया तो उसने फोन करके अपनी मम्मी को गाँव मे बता दिया कि वह अब उनकी मर्जी के अनुसार गाँव की ही किसी लड़की से शादी करने के लिए तैयार है और वह अगले रविवार को गाँव आकर लड़की पसंद कर लेगा।


अजय अब जल्दी में था। शनिवार की शाम को ही वह अपने गाँव पहुँच गया। उसके घर मे उसके इस फैसले से सभी बहुत खुश थे। अजय के माता पिता ने अपनी पसंद के हिसाब से अजय को गाँव की 5 लड़कियों को दिखाने की योजना बना रखी थी।

पहली लड़की कोमल थी जो गाँव के प्रधान राम बहादुर की इकलौती लड़की थी। वह लगभग 19 साल की थी।

दूसरी लड़की शिल्पा थी जो गाँव के सबसे बड़े सेठ अमीरचंद की बेटी थी जो लगभग 20 साल की थी।

तीसरी लड़की मोहिनी थी जो गाँव के बहुत बडे किसान धनपत राय की बेटी थी। मोहिनी भी लगभग 19 साल की थी।

चौथी लड़की का नाम गुड़िया था जो मध्यम वर्ग परिवार से थी और उसके पिता मोहन लाल की गाँव मे किराने की दुकान थी। लड़की की उम्र लगभग 18 साल की थी।

पांचवी लड़की महिमा थी जो गाँव के स्कूल के हेडमास्टर भारत भूषण की बेटी थी। उसकी उम्र भी 20 साल के करीब थी।

महिमा आठवीं कक्षा तक पढ़ी थी। बाकी सभी लड़कियां एकदम अनपढ़ थीं। 

अजय ने सभी लड़कियों से मिलने के लिए एक शर्त अपने मम्मी पापा के सामने पहले ही रख दी थी: मैं हर लड़की से अकेले में कम से कम 15 मिनट के लिये जरूर मिलूंगा। उसके बाद ही आपको अपना फैसला बताऊंगा।

अजय के माता पिता को भला इसमें क्या ऐतराज था। उन्होंने सोचा कि लड़का पढ़ा लिखा है। बैंक में बड़ा अफसर है -इसलिये लड़की से अकेले में मिलकर कुछ बातचीत करना चाहता होगा। 

लड़कियों के माँ बाप भी अजय की इस शर्त पर खुशी खुशी राजी हो गए क्योंकि उन्हें यह लग रहा था कि उनकी अनपढ़ गाँव की लड़की को इतना पढ़ा लिखा बैंक का अफसर अपने दामाद के रूप में मिल रहा है।

अगले दिन अजय के मम्मी पापा अजय को लेकर सबसे पहले ग्राम प्रधान राम बहादुर के घर पहले से तय समय 11 बजे पहुंच गए । उनकी लड़की कोमल साड़ी पहने सर झुकाए शर्माती हुई बैठी थी। देखने मे कोमल बेहद खूबसूरत थी लेकिन अजय के दिमाग मे उसे देखकर कुछ और ही चल रहा था। औपचारिक बातचीत के बाद यह तय हुआ कि पहली मंजिल पर बने एक कमरे में अजय और कोमल अकेले 15 मिनट की मुलाकात करेंगे। 

अजय कोमल के साथ पहली मंजिल पर बने उस कमरे में आ गया। कमरे में आने के बाद अजय ने कोमल से कहा: कमरा अंदर से बंद कर दो। कोमल पहले ही घबराई और शर्मायी हुई थी। उसने कमरे की चिटखनी अन्दर से बंद कर दी।

कोमल की खूबसूरती देखकर अजय का लण्ड खड़ा हो चुका था। वह इस मौके का भी भरपूर फायदा उठाना चाहता था। उसने कमरे में रखे सोफे पर बैठते हुए कोमल से कहा: शादी का मतलब पता है क्या होता है?

कोमल सर हिलाकर बोली : नही मालूम

अजय : चलो मैं बताता हूँ। चलो अपनी साड़ी खोलो।

कोमल बिना साडी खोले ऐसे ही खड़ी रही और बोली: मुझे शर्म आती है। मैंने तो पहले कभी किसी के सामने अपने कपड़े नही खोले हैं।

अजय : यही तो मुझे देखना कि तुम एकदम अनपढ़ गँवार ही हो यह तुम्हे ठीक किया जा सकता है। मेरे पास समय बहुत कम है। 5 मिनट पहले ही बर्बाद हो चुके हैं। अब अगर बचे हुए 10 मिनट में तुमने वह सब नही किया जो मैं कह रहा हूँ तो इस शादी के बारे में भूल जाओ।

कोमल : नही, आप बताइए मुझे क्या करना है। मैं सब कुछ करने के लिए तैयार हूँ।

अजय : जल्दी से साड़ी भी खोलो और बाकी के कपड़े भी उतारकर अपना बदन मुझे दिखाओ। 

कोमल ने जल्दी से साड़ी उतार दी और उसके बदन पर अब ब्लाउज और पेटीकोट ही बचे थे।

अजय : जल्दी से इन्हें भी उतारो

कोमल बहुत शर्मा रही थी। यह सब उसके साथ पहली बार हो रहा था।

कोमल ने ब्लाउज और पेटीकोट भी उतार दिए। उसके बदन पर अब एक ब्रा और पैंटी ही बची थी। 

अजय : अपने दोनों हाथ ऊपर उठाओ और मेरी तरफ आओ।

कोमल धीरे धीरे चलते हुए अजय की तरफ आने लगी। अजय अपने बेकाबू हो रहे लण्ड को सहलाये जा रहा था।

कोमल अपने दोनों हाथ उठाये अजय के एकदम नज़दीक आकर खड़ी हो गई।

अजय सोफे से उठकर खड़ा हो गया और कोमल के बदन के पीछे सटकर खड़ा हो गया। अपनी पैंट में तन रहे लंड को उसने कोमल के नितंबों पर दबाते हुए अपने हाथों को उसने उसकी ब्रा के अंदर डाल दिया और उसके मस्त दूधिया स्तनों को खूब दबाया सहलाया। इसके बाद उसने अपने हाथ को उसकी पैंटी के अंदर घुसेड़ दिया और उसकी चिकनी योनि पर अपना हाथ फिराया।

कोमल की चिकनी जाँघों और चिकने पेट को भी अजय अपने हाथों से जी भरकर दबाता सहलाता रहा।

जब 15 मिनट पूरे होने को आये तो उसने कोमल को अपनी गिरफ्त से आज़ाद करते हुए कहा: चल अब अपने कपड़े पहन लें।


सेठ अमीरचंद के घर जब अजय अपने माता पिता के साथ पहुंच तो उसकी लड़की शिल्पा की खूबसूरती को देखकर वह दंग रह गया। शिल्पा कोमल से भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी और लाल साड़ी में कसी उसकी जबरदस्त फिगर बेहद सेक्सी लग रही थी। 

जब अजय शिल्पा को लेकर अकेले में मिलने के लिए एक कमरे में आया तो उसने शिल्पा से कमरा अंदर से बंद करवा दिया और फिर ज्यादा समय बर्बाद किये बिना शिल्पा से बोला: अपने कपड़े उतारकर अपना बदन दिखाओ। अगर तुम्हारा जिस्म मुझे पसंद आया तो मैं तुमसे शादी करूँगा, वरना नही। चलो अब शुरू हो जाओ।

सेठ जी की लड़की एकदम बिगड़ गयी और उसने कपड़े उतारने से मना करते हुए कहा: मुझे ऐसी वैसी गँवार लड़की मत समझना। मुझे नही करनी तुमसे शादी।

अगला नम्बर धनपत राय की बेटी मोहिनी का था।

मोहिनी को लेकर जब अजय अकेले में बंद कमरे में पहुंचा तो उसने मोहिनी से भी यही कहा: अपने सारे कपडे उतारो और एकदम नंगी हो जाओ। जिस लड़की का नंगा बदन औऱ फिगर मुझे पसंद आएगा, वही लौंडिया मेरी वाइफ बनेगी।

मोहिनी ने सलवार सूट पहना हुआ था।

उसने पहले अपना कुरता खोलकर अलग किया और फिर सलवार के नाड़े को खींचकर खोल दिया। अब उसके बदन पर ब्रा और पैंटी ही बची थी।

अजय ने हिम्मत करते हुए मोहिनी से कहा: ब्रा और पैंटी भी उतारो। 

मोहिनी ने ब्रा और पैंटी भी उतार दी। वह एकदम निर्वस्त्र खड़ी थी। शर्म की वजह से उसने अपनी आंखें बंद कर लीं थी।

अजय उसकी फिगर को देखकर एकदम दीवाना सा हो गया था। उसने मोहिनी के पूरे बदन पर हाथ फिर फिराकर उसे खूब दबाया सहलाया। मोहिनी के दूधिया मम्मे दबाने के बाद अजय के हाथ मोहिनी की चिकनी जाँघों,योनि प्रदेश और चिकने पेट को सहला रहे थे।





15 मिनट पूरे होते ही अजय ने मोहिनी को भी अपनी गिरफ्त से आज़ाद करते हुए कहा: चलो अब अपने कपड़े पहन लो।

मोहिनी के साथ मौज़ मस्ती करने के बाद अजय और उसके मम्मी पापा अब मोहन लाल के घर उसकी लड़की गुड़िया को देखने पहुंच गए।

गुड़िया इतनी ज्यादा खूबसूरत और सेक्सी लग रही थी कि अजय की हालत उसे देखते ही बेकाबू सी हो चली थी। वह औपचारिक बातचीत के खत्म होने का बेसब्री से इंतजार कर रहा था क्योंकि उससे अब खुद पर कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था।

गुड़िया को लेकर वह जैसे ही कमरे में घुसा, उसने दरवाज़े को खुद ही अंदर से बंद कर लिया और कमरे में पड़े सोफे पर अपनी टाँगे फैलाकर बैठ गया। 

अजय गुड़िया से बोला: इधर आओ मेरे पास

गुड़िया सहमी शर्मायी सी अजय के पास आकर खड़ी हो गई।

अजय : और नज़दीक आओ मेरे।

गुड़िया अब अजय के एकदम करीब उसकी दोनों टाँगों के बीच मे आकर खड़ी हो गई।

अजय ने एक ही झटके में गुड़िया की साड़ी के पल्लू को खींचकर उसकी साड़ी उतार दी 

गुड़िया बहुत ज्यादा घबरा भी रही थी और शरमा भी रही थी। उसे कुछ समझ नही आ रहा था कि यह सब क्या हो रहा था। साड़ी खुलने के बाद अब उसके बदन पर एक ब्लाउज और पेटीकोट बचा था।

अजय गुड़िया की तरफ देखकर बोला: तुझे मुझसे शादी करनी है ना ?

गुड़िया: हाँ करनी है

अजय : तो जो मैं कहूँगा तुझे वह सब करना पड़ेगा। बोल मंजूर है?

गुड़िया: हाँ मुझे सब मंजूर है। 

अजय : चल नीचे घुटनों के बल बैठ जा - टाइम कम है मेरे पास, इसलिये जो कहूँ उसे फटाफट कर। समझी?

गुड़िया: हाँ जी समझ गयी

गुड़िया घुटनों के बल अजय की दोनों टाँगों के बीच अपना खूबसूरत चेहरा लिए बैठी थी।

अजय ने अपनी पैंट की ज़िप खोलकर उसमे से अपने लण्ड को बाहर निकाला और उसे गुड़िया के होंठों पर रगड़ते हुए बोला:चल अब अपना मुंह खोल और इसे अपनी जीभ से सहला सहला कर चाट।

गुड़िया: लेकिन मुझे यह सब आता नही है। इसलिए कोई गलती हो जाये तो उसके लिए माफ कर देना।

अजय समझ गया कि लौंडिया एकदम "सेक्स स्लेव" मटेरियल है। वह उससे बोला: कोई बात नही, मैं तुम्हे सब कुछ सिखाऊंगा। मैं सिर्फ यह टेस्ट कर रहा हूँ कि तुम सीख भी सकोगी या नही। चलो इसे मुंह में लो और इस पर अपनी जीभ इस तरह फिराओ जैसे कि इसकी मालिश कर रही हो।

गुड़िया ने अजय के लण्ड को मुंह मे लेकर जैसे ही अपनी जीभ फिरानी शुरू की, अजय के लंड की वीर्य रस धारा ने गुड़िया के मुंह को भर दिया।

अजय उससे बोला: यह जूस बहुत बढ़िया होता है। हर औरत को नियमित रूप से अपने पति के लण्ड का यह जूस पीना जरूरी होता है। तुमने इसे पीकर यह टेस्ट तो पास कर लिया है। बाकी की ट्रेनिंग भी मैं तुम्हे दे दूँगा क्योंकि तुम्हारे अंदर सीखने की इच्छा है। अब इस गीले लण्ड को अपनी जीभ से चाट चाट कर साफ भी करो। 

गुड़िया ने अजय के गीले लण्ड को अपनी जीभ से चाटकर साफ करना शुरू कर दिया। 15 मिनट पूरे होने वाले थे इसलिए अजय को मजबूरन गुड़िया से यह कहना पड़ा: अब तुम अपने कपड़े पहनो और शादी की तैयारियाँ शुरू करो।मैं तुम्हें ही अपनी वाइफ बनाऊंगा।

हालांकि अजय ने मन बना लिया था कि वह गुड़िया को ही अपनी वाइफ बनाएगा फिर भी उसका मन था कि पांचवी लड़की महिमा के साथ भी कुछ मौज़ मस्ती कर ली जाए तो उसमें हर्ज़ ही क्या है।

आखिर में अजय अपने माता पिता के साथ महिमा के हेडमास्टर पिता के घर पहुंच गया। अब तक कि सभी लड़कियां एकदम अनपढ़ थीं। लेकिन महिमा 8 वीं क्लास तक अपने पिताजी के स्कूल में ही पढ़ी थी।

महिमा भी खासी सुंदर थी और नीली साड़ी में एकदम मस्त माल लग रही थी।

अजय अव्वल दर्जे का बदमाश था। महिमा को लेकर वह अकेले में मिलने के लिए जैसे ही कमरे में आया उसने अपने सारे कपड़े फटाफट उतार दिए और हाथ में एक छड़ी लेकर कुर्सी पर बैठते हुए कड़क आवाज़ में महिमा से बोला: चलो अपने कपड़े उतारो और मेरी गोद मे आकर लेट जाओ। मेरी बात नही मानोगी तो इस छड़ी से तुम्हारे मस्त नितंबों पर 100 स्ट्रोक लगाऊंगा।

महिमा ने जल्दी से अपने कपड़े उतारे और अजय की गोद मे आकर लेट गई।महिमा के नितंबों को अजय ने अपने खड़े लण्ड पर एडजस्ट करते हुए अपने एक हाथ से उसके मम्मे दबाने शुरू कर दिए और दूसरे हाथ की छड़ी उसके होंठों के नज़दीक ले जाकर कड़क आवाज़ में बोला: मुंह खोलो और इस छड़ी को इस तरह चूसो मानों मेरा लण्ड चूस रही हो। जल्दी करो।

महिमा ने वही सब कुछ किया जो अजय कहता गया।

15 मिनट की मौज़ मस्ती के बाद अजय ने महिमा को भी अपनी गिरफ्त से आज़ाद करते हुए कहा: अब तुम अपने कपड़े पहन सकती हो।

सब लड़कियों के साथ मौज़ मस्ती करने के बाद अजय मम्मी पापा के साथ घर वापस आ गया था। माता पिता इस बात की प्रतीक्षा कर रहे थे कि अब अजय अपनी पसंद के बारे में उन्हें बताएगा कि कौन खुशनसीब लड़की उनके घर की बहू बनने जा रही है।

अजय भी इस मामले में देर नही करना चाहता था। उसने अपनी पसंद के बारे में मम्मी को बताते हुए कहा : मैं गुड़िया से शादी करना चाहता हूँ। 

अजय के कहने भर की देर थी। उसके माता पिता ने "चट मंगनी और पट ब्याह" की तर्ज़ पर गुड़िया की शादी अजय से करवा दी और अजय गुड़िया को लेकर शहर में आ गया।

अजय ने आफिस से एक हफ्ते की छुट्टी ले रखी थी। 

अजय इस एक हफ्ते में गुड़िया को "सेक्स स्लेव" बनाने की ट्रेनिंग देने का मन बना चुका था। उसे अपने दोस्त विनय की वह बात भी याद आ रही थी, जिसमे उसने अजय से कहा था: अपनी वाइफ को ट्रेनिंग देने के लिए सबसे खास रात सुहागरात होती है। उस रात को तुम उसके साथ जो कुछ भी करोगे, उसे यही लगना चाहिए कि शादी के बाद यह सब ही होता है। फिर वह सारी जिंदगी वही करेगी जो उसने फर्स्ट नाईट को किया है।

आज अजय और गुड़िया की सुहाग रात यानि फर्स्ट नाईट थी। दिन भर में अजय ने खुद बाजार में जाकर गुड़िया के लिए मॉडर्न तरीके के काफी सारे कपडे खरीद लिए थे क्योंकि वह अपने साथ तो गाँव से सिर्फ कुछ साड़ियां ही लेकर आई थी।

अजय के मन मे फर्स्ट नाईट का पूरा प्लान बना हुआ था। डिनर करने के बाद वह बेडरूम में आकर सोफे पर अपनी टाँगे फैलाकर बैठ गया। इस समय उसके बदन पर सिर्फ एक सफेद अंडरवियर था जिसमे से उसका तनकर खड़ा लण्ड बाहर निकलने के लिए बेताब हो रहा था।

गुड़िया साड़ी पहने हुए और घूंघट किये हुए बेड पर बैठी हुई थी।

अजय ने अंडरवियर में खड़े हो चुके लण्ड के उभार को सहलाते हुए गुड़िया से रौबीली आवाज़ में कहा: इधर मेरे नज़दीक आकर खड़ी हो जाओ।

गुड़िया जल्दी से बेड से नीचे उतरी और अजय के सामने खड़ी हो गयी।

अजय : साड़ी उतारो

गुड़िया अपनी साड़ी उतारने लगी।

अजय: बाकी के सारे कपड़े भी खोलकर एकदम नंगी हो जाओ

गुड़िया ने बाकी के सारे कपड़े भी उतार दिए और शर्माती हुई अपने एक हाथ से अपने सीने को और दूसरे हाथ से अपनी योनि को ढंकने का प्रयास करने लगी।

अजय पूरी मस्ती में आ चुका था : अपने दोनों हाथ ऊपर उठाओ और अपने जिस्म को गोल गोल घुमाकर दिखाओ।

गुड़िया ने वही किया जो अजय ने हुक्म दिया था। वह अपने दोनों हाथों को उठाकर गोल गोल घूमने लगी।

अजय उसकी मस्त फिगर को देख देख कर अपनी आंखें सेंक रहा था। ऐसा मदमस्त और सेक्सी नज़ारा उसने आज तक पोर्न फिल्मों में भी नही देखा था।

अजय बेकाबू हो चुका था। वह गुड़िया से कहने लगा: अब मेरे बिल्कुल नज़दीक आकर खड़ी हो जाओ।

गुड़िया उसके एकदम नज़दीक उसकी दोनों जाँघों के बीच मे आकर खड़ी हो गयी। अब अजय ने अपने हाथों को उसके निर्वस्त्र बदन पर फिराना शुरू कर दिया। गुड़िया ने अचानक अपने दोनों हाथों को नीचे कर लिया तो अजय ने उसके गालों पर हल्की सी चपत लगाकर कहा: हाथ ऊपर उठाकर खड़ी रहो। जब तक मैं हाथ नीचे करने की परमिशन न दूं, तुम्हारे हाथ इसी तरह ऊपर की तरफ रहने चाहिए।

अजय गुड़िया की मक्खन मलाई जैसी जाँघों पर हाथ फिराते हुए अपने हाथ को उसकी दोनों टाँगों के बीच बने चिकने योनि प्रदेेश पर ले गया और उसकी योनि को दबाते सहलाते हुए बोला: टाँगों को फैलाओ।

गुड़िया ने अपनी टाँगें फैला दीं ताकि अजय अपने हाथ को उसकी योनि पर ठीक से फिरा सके।

गुड़िया को अजय एक "सेक्स टॉय" की तरह इस्तेमाल कर रहा था। गुड़िया अब हाथ ऊपर उठाये उठाये काफी थक चुकी थी। वह पहली बार अजय से कुछ बोली : मेरे हाथों में बहुत दर्द हो रहा है। अब मुझे अपने हाथ नीचे करने दो।

अजय : चलो हाथ नीचे कर लो और यहाँ मेरे पैरों के पास मुर्गा बन जाओ।

गुड़िया : मुझे नही आता मुर्गा बनना

अजय समझ गया कि यह लौंडिया कभी स्कूल नही गई तो मुर्गा बनना इसे नही आता होगा 

अजय : चलो आज मैं तुम्हे मुर्गा बनाकर दिखाता हूँ। आगे से तुम्हे खुद ही मुर्गा बनना होगा।

अजय ने गुड़िया के निर्वस्त्र जिस्म को पकड़कर उसे ज़मीन पर झुकाते हुए मुर्गा पोजीशन में खड़ा कर दिया और फिर अपने दोनों पैरों को उसने गुड़िया की पीठ पर रखकर रगड़ना शुरू कर दिया। गुड़िया हिलने लगी तो अजय ने अपने पास रखे एक बेंत को उठाकर गुड़िया के मस्त नितंबों पर जोरदार स्ट्रोक लगाया और बोला: सीधी मुर्गा बनकर खड़ी रह। हिलेगी तो बेंत से पिटाई होगी।

अजय ने अपने एक पैर को उसकी पीठ से उठा लिया और उसे लेकर वह गुड़िया के होंठों के पास ले गया। अपने पैरों के तलवे को अजय गुड़िया के चेहरे और होंठों पर रगड़ने लगा। बीच बीच मे वह बेंत के स्ट्रोक गुड़िया के नितम्बों पर मारते हुए कह रहा था: सीधी खड़ी रह साली नही तो और सख्त सजा दूंगा तुझे।
गुड़िया मुर्गा बने बने अब थक चुकी थी। इधर अजय का लण्ड भी अब राहत की तलाश में था। जैसे ही गुड़िया बोली कि वह मुर्गा बने बने अब थक गई है, अजय ने फौरन ही उसे फरमान जारी कर दिया: चल मेरी टाँगों के बीच घुटनों के बल बैठ जा।

गुड़िया अजय की टाँगों के बीच घुटनों के बल बैठ गयी और अजय की तरफ इस तरह देखने लगी मानो उसके अगले आदेश की प्रतीक्षा कर रही हो।

अजय ने गुड़िया के दोनों गालों पर चपत मारते हुए कहा: मेरे इशारों को समझने की आदत डाल लें। अगर मैं कहूं कि मेर सामने घुटनों के बल बैठ जा तो इसका मतलब यह है कि तुझे अब मेरा लण्ड अपने मुंह मे लेकर मुझे खुश करना है। चल अब शुरू हो जा।

गुड़िया आगे बढ़ी और अजय के अंडरवियर में तनकर खड़े हुए लण्ड पर अपना हाथ फिराने लगी। अजय पूरी मस्ती में था।
गुड़िया ने अजय के लण्ड को अपने मुंह मे लेकर उस पर अपनी जीभ फिराना शुरू कर दिया। अजय जबरदस्त तरीके से गुड़िया के साथ मुख मैथुन कर रहा था और बीच बीच मे उसके गालों पर थप्पड़ मारते हुए कह रहा था: ठीक से चूस मेरा लण्ड वरना और पिटेगी।
मुख मैथुन के बाद भी अजय का मन नहीं भरा तो उसने गुड़िया के लिए नया फरमान जारी करते हुए कहा: मेरी जाँघों पर उल्टी होकर लेट जा। अब तेरे इस खूबसूरत जिस्म की स्पैकिंग की जाएगी।

स्पैकिंग क्या होती है, इसका अंदाज़ा गुड़िया को नही था। लेकिन अजय ने अब तक जो कुछ भी पोर्न फिल्मों में देख रखा था, वह सब आज की रात कर लेना चाहता था।

निर्वस्त्र गुड़िया अब उल्टी होकर अजय की गोद मे लेटने के लिए आगे बढ़ी। अजय ने गुड़िया के खूबसूरत जिस्म को अपनी जाँघों पर इस तरह एडजस्ट किया ताकि गुड़िया का खूबसूरत चेहरा और होंठ अजय की लेफ्ट जाँघ पर टिका रहे, गुड़िया के मक्खन जैसे मम्मे उसके अंडरवियर में कैद लण्ड पर टिके रहें और उसकी केले जैसी चिकनी जांघें अजय की राइट जाँघ पर टिकी रहें।

अजय ने गुड़िया के जिस्म की यह सेटिंग एक पोर्न फिल्म के सीन को देखकर की थी। उस सीन को देखकर अजय को बहुत मज़ा आया था। आज वह उस फिल्म में देखे गए सीन को लाइव करके देखना चाहता था। कुछ देर तक वह गुड़िया की पीठ और नितंबों पर हाथ फिर फिरा कर उन्हें सहलाता और थपथपाता रहा। अब तक गुड़िया शांत होकर लेटी हुई थी लेकिन आगे क्या होने जा रहा था उसका अंदाज़ा गुड़िया को नही था।

अजय ने अपने प्लान के मुताबिक अपने हाथ मे लकड़ी की एक छड़ी लेकर उसे गुड़िया के नितंबों पर मारना शुरू कर दिया। छड़ी के हर स्ट्रोक पर गुड़िया अजय की गोद मे जोर जोर से उछल रही थी। गुड़िया के उछलने से उसके मम्मे अजय के खड़े लण्ड से टकरा रहे थे और गुड़िया के होंठ और चेहरा अजय की बायीं जाँघ से इस तरह रगड़ खा रहा था मानों गुड़िया उसकी जाँघ पर चुम्बन दे रही हो। कुल मिलाकर अजय पूरी मस्ती में गुड़िया के नंगे बदन से मौज़ ले रहा था। गुड़िया को समझ नही आ रहा था कि उसकी कोई गलती न होने पर भी उसके नितम्बों की स्पैकिंग क्यों की जा रही थी। लेकिन अजय आज की रात गुड़िया को हर तरीके की यौन प्रताड़ना देकर उसे हमेशा के लिए अपनी सेक्स स्लेव बना लेना चाहता था।
गुड़िया की स्पैकिंग करते करते ही अजय क्लाइमैक्स पर पहुंच गया और उसके लण्ड से वीर्य निकलने लगा।

अब अजय ने गुड़िया को अपनी दोनों टाँगों के बीच मे घुटनों के बल बिठाते हुए कहा: चल मेरे गीले लण्ड को अपनी जीभ से चाट चाट कर साफ कर।

गुड़िया अजय के लण्ड को अपनी जीभ से चाट चाटकर साफ करने लगी।


वीर्य अचानक निकल जाने की वजह से अजय की जाँघें भी वीर्य से गीली हो गई थीं और काफी वीर्य उसके पैरों पर भी गिर गया था।

अजय ने गुड़िया को जमीन पर घुटनों के बल बिठाकर उसे हुक्म दिया: मेरे पैर गीले हो गए हैं, इन्हें भी अपनी जीभ से चाट कर साफ करो। गुड़िया ने अजय के पैरों को चाटना शुरू कर दिया।

अब जरा मेरी गीली जाँघों को भी चाटकर साफ करो।

गुड़िया अब अजय की गीली जांघें भी चाटकर साफ करने लगी।

गुड़िया के साथ मौज़ मस्ती करते करते रात के 3 बज गए थे। अजय ने हालांकि एक हफ्ते की छुट्टी ले रखी थी फिर भी उसे अब खुद हल्की हल्की नींद आ रही थी। गुड़िया की ट्रेनिंग भी अब काफी हो चुकी थी। लिहाज़ा अजय अब गुड़िया से बोला: जाओ अब बिस्तर पर जाकर लेट जाओ। 

गुड़िया एकदम निर्वस्त्र थी।

वह डरते हुए अजय की तरफ देखकर पूछने लगी: कपड़े पहनकर लेटना है या ऐसे ही?

अजय को गुड़िया के अंदर का यह डर बहुत अच्छा लगा. वह रौबीली आवाज़ में बोला: जब तक मैं न कहूँ तुम नंगी ही रहोगी। अभी मैं बिस्तर पर तुम्हारे इस मस्त जिस्म के साथ और भी खिलवाड़ करने वाला हूँ।

निर्वस्त्र गुड़िया बिस्तर पर जाकर लेट गयी। अजय के बदन पर भी सिर्फ एक अंडरवियर ही था। वह भी बिस्तर पर जाकर गुड़िया के साथ लेटते हुए बोला: अब तुम अपने हाथों से मेरे बदन को सहला सहला कर तब तक मालिश करो जब तक कि मुझे गहरी नींद न आ जाये। हर रोज तुम्हे मुझे इसी तरह सुलाना है। चलो शुरू हो जाओ।

गुड़िया उठकर अजय के बदन पर हाथ फिराने लगी।

अजय ने अपनी जाँघे चौड़ी करते हुए कहा: मेरी जाँघों को सहलाओ।

गुड़िया के हाथ अजय की जाँघों को सहलाने लगे। जाँघों के बीच अंडरवियर में उसका लण्ड फिर से तनकर खड़ा हो चुका था।

अजय की बदमाशी अब बढ़ती जा रही थी। वह गुड़िया से बोला: जाँघों को हाथों से नही, अपने चेहरे से रगड़कर सहलाओ।

गुड़िया ने अपने जिस्म को झुकाते हुए अपने चेहरे को अजय की जाँघों पर रगड़ना शुरू कर दिया। गुड़िया के मस्त मस्त मम्मे अजय की टाँगों से टकरा रहे थे। अजय पूरी मस्ती में था। वह गुड़िया से कहने लगा: हर रात तुम्हे इसी तरह मेरे जिस्म की मालिश करनी है। 

अजय और गुड़िया इस मौज़ मस्ती में कब सो गए यह पता ही नही चला।

सुबह जब अजय की आंख खुली तो उसने देखा कि गुड़िया उसके लण्ड पर अपना चेहरा टिकाकर सो रही है। शायद रात को गुड़िया को भी अजय की जाँघों की चेहरे से मालिश करते करते ही नींद आ गयी थी। 

गुड़िया के गाल पर हल्का सा चपत लगाकर अजय ने उसे जगाया और बोला: मेरे लण्ड को अपने मुंह मे लेकर इसकी मालिश करो। हर सुबह तुम्हे सबसे पहला काम यही करना है। चलो शुरू हो जाओ।

गुड़िया के साथ मौज़ मस्ती करते करते पूरा एक हफ्ता निकल गया। अजय को अब कल आफिस जाना था। अजय ने इस एक हफ्ते में गुड़िया को पूरी तरह अपना सेक्स स्लेव बना लिया था और उसका नाम भी बदलकर- मोहिनी कर दिया था।

अब गुड़िया अजय के इशारों पर नाचने वाली मोहिनी बन चुकी थी।

दफ्तर जाते वक्त अजय गुड़िया से बोला: दरवाज़ा अंदर से बंद कर लो और कोई भी घण्टी बजाए तुमने दरवाज़ा नही खोलना है। जब शाम को मैं आऊंगा तो दरवाज़ा चाबी से खोलकर घर के अंदर आ जाऊंगा। शाम को तुम बिस्तर के ऊपर मुर्गा बनकर खड़ी हो जाना। तुम्हारे जिस्म पर सिर्फ एक ब्रा और अंडरवियर होना चाहिए और उसे पहने पहने ही बिस्तर पर मुर्गा बनकर खड़ा होना है। अगर मेरे इस हुक्म की तामील नही हुई तो फिर तुम्हे सख्त सजा मिलेगी।

यह कहकर अजय ऑफिस चला गया।

अजय का दफ्तर में मन नही लग रहा था और रह रहकर उसे मोहिनी के मस्त जिस्म को पेलने का ही ख्याल आ रहा था। विनय ने भी अजय से मस्ती करते हुए पूछ लिया: क्यों भाई। मेरा आईडिया कैसा रहा? खूब मस्ती आ रही है या नही?

अजय : हाँ यार तेरा आईडिया तो बहुत जबरदस्त था। एक हफ्ते में मैंने मोहिनी को अपना सेक्स स्लेव बना लिया है। अब वह मेरे इशारों पर ही नाचने वाला खिलौना बन चुकी है। 

विनय अजय की शादी में गया था और तभी उसने मोहिनी को दुल्हन के रूप में देखा था। मोहिनी की खूबसूरती देखकर विनय का उस समय ही लण्ड तनकर खड़ा हो गया था। विनय की अपनी वाइफ माधुरी भी हालांकि काफी सुंदर और सेक्सी फिगर वाली है लेकिन मोहिनी एकदम कच्ची कली थी जिसे विनय अपने तरीके से चखना चाहता था। उसके पास इसकी भी एक योजना थी।

विनय के घर जब अजय गया था तो विनय ने जान बूझकर अपनी वाइफ माधुरी को अजय के हवाले कर दिया था और खुद फोन का बहाना करके दूसरे कमरे में चला गया था। अजय को यह बात याद थी। 

शाम को जब दफ्तर की छुट्टी हुई तो अजय ने फॉर्मेलिटी के लिये विनय से कहा: चल भाई, आज मेरे साथ चल। मेरे घर मे आज मोहिनी के हाथ का चाय नाश्ता करके ही जाना।

अजय के कहने की देर थी - विनय एकदम तैयार हो गया और सारे रास्ते अजय को इस बात के फायदे बताने लगा कि एक वाइफ को पेलते पेलते बोरियत हो जाती है। लिहाजा समझदारी इसी में है कि अपनी वाइफ को भी दोस्तों के साथ मिल बाँटकर चखना चाहिए। 

अजय कुछ समझा नही : यार यह क्या बात कर रहा है?

विनय : अरे भाई इसमें न समझने वाली कौन सी बात है। जब तुम मेरे घर आये थे तो क्या मैंने अपनी वाइफ को तुम्हारे हवाले नही कर दिया था? बाकी तेरी मर्ज़ी है। लेकिन मेरी बात मानेगा तो मौज़ ही मौज़ रहेगी। सोचकर देख कि कभी तेरे नीचे मोहिनी का जिस्म दबा हुआ है और कभी माधुरी का। दोनो ही तेरे इशारों पर नाचेंगी।

अजय : इसका मतलब यह हुआ कि मोहिंनी और माधुरी दोनो तेरे इशारों पर भी नाचेंगी।

विनय : बिल्कुल। अब आयी बात समझ मे।

तब तक अजय घर आ गया था और चाबी से दरवाज़ा खोलकर विनय के साथ अंदर आ गया।

अजय अब विनय की तरफ शरारत से देखते हुए बोला: यार मैं वाशरूम जाकर आता हूँ। मुझे आधा घण्टा लग जायेगा। तब तक तुम अपनी दूसरी वाइफ "मोहिंनी" को चखकर देख लो। वह बैडरूम में बिस्तर पर तुम्हारा ही वेट कर रही है।

अजय जानबूझकर वाशरूम का बहाना करके दूसरे कमरे मे चला गया और विनय जैसे ही बैडरूम में घुसा, वह एकदम चौंक गया क्योंकि वहाँ मोहिंनी ब्रा और पैंटी पहने बिस्तर पर मुर्गा बनी हुई थी।



मोहिंनी को इस पोजीशन में देखते ही विनय का लण्ड तनकर खड़ा हो गया।

मोहिंनी ने जैसे ही देखा कि अजय की जगह कोई और उसके बैडरूम में घुस आया है तो वह घबराकर उठकर खड़ी होने लगी: आप कौन हो? हमारे पति कहाँ हैं?

विनय कड़क आवाज़ में मोहिंनी से बोला: ज्यादा सवाल जबाब मत कर। तेरा काम हमारी आज्ञा का पालन करने का है। जो तुझसे कहा जाए वह चुपचाप करती जा, वरना तुझे सज़ा मिलेगी।

मोहिंनी गंवार जरूर थी लेकिन उसे यह मंज़ूर नही था कि पति के अलावा कोई और गैर मर्द उसके साथ बदमाशी करने की हिम्मत करे। 
वह जोर से चीखते हुए बोली: अरे तुम होते कौन हो हमे सज़ा देने वाले ? सिर्फ हमारे पति ही हमे सज़ा दे सकते हैं। चलो भागो यहाँ से। मेरे पति जल्द ही आने वाले होंगे। उनके आने का भी समय हो गया है।
विनय ने बैडरूम का दरवाजा अंदर से चिटखनी लगाकर बन्द कर लिया और अपनी पैंट में से चमड़े की बेल्ट को निकालकर उसे मोहिंनी के नितम्बों पर मारता हुआ बोला: अब तुझे ऐसी सज़ा मिलेगी जिसे तू हमेशा याद रखेगी। चल अपने दोनों हाथ ऊपर उठाकर एक पैर पर खड़ी हो जा।

मोहिंनी अपने नितम्बों को सहलाते हुए बोली: यह कैसी सज़ा है। कोई एक पैर पर कैसे खड़ा हो सकता है?

विनय ने फिर से उसके नितम्बों पर बेल्ट को जोर से मारते हुए कहा: जैसा मेरा हुक्म है वैसा करती जा। नही तो यह चमड़े की बेल्ट तेरे इस खूबसूरत जिस्म को गर्म करती रहेगी। यह कहते कहते विनय ने लगातार तीन चार बेल्ट स्ट्रोक मोहिंनी के जिस्म पर लगा दिए और वह दर्द से उछल उछल कर कूदने लगी और विनय से गिड़गिड़ाते हुए बोली: अब बस करो। अब और मत मारो। मैं आपकी हर बात मानने के लिए तैयार हूं।

विनय अब सोफे पर रिलैक्स होकर बैठ गया और बोला: चल अपने दोनों हाथ ऊपर उठाकर एक पैर पर खड़ी हो जा।

मोहिंनी मार से बचने के लिए अपने दोनों हाथ ऊपर उठाकर एक पैर पर खड़े होने का प्रयास करने लगी। विनय ने कड़क आवाज़ में कहा: सीधी खड़ी रह साली। अगर जरा भी हिली तो बेल्ट के और स्ट्रोक लगाऊंगा।

मोहिंनी बला की खूबसूरत थी और उसकी जबरदस्त सेक्सी फिगर थी। विनय मोहिंनी के जिस्म को अपने हाथों से सहलाने लगा।

मोहिंनी को एक पैर पर खड़े होने में बहुत ज्यादा तकलीफ हो रही थी। वह गिड़गिड़ाते हुए विनय से बोली: मुझे दोनो पैरों पर खड़ा होने दो। आप जो कहोगे मैं वह सब कुछ करूंगी। बस अब मुझसे एक पैर पर खड़ा नही हुआ जा रहा है।

विनय अब मस्ती में आ चुका था। उसने अपने कपड़े उतार दिए और एक अंडरवियर पहने ही वह कुर्सी पर बैठते हुए मोहिंनी से बोला: चल अब तू। अपने दोनों पैरों पर खड़ी हो जा और इधर मेरे पास आकर मेरी जाँघों के बीच खड़ी हो जा।

मोहनी विनय के पास आ गयी तो उसने मोहिंनी को अपनी बायीं जाँघ पर बिठाते हुए उसके बदन को दबाना और सहलाना शुरू कर दिया। विनय अब मोहिनी के साथ जी भरकर मनमानी कर रहा था। मोहिंनी अब उसके हाथ मे एक खिलौना बनकर रह गयी थी।

विनय ने कुछ देर तक मोहिंनी के बदन के साथ खिलवाड़ की और फिर उससे बोला: चल ज़मीन पर घुटनों के बल इस तरह खड़ी हो जिससे तेरा चेहरा मेरी गोद मे टिका रहे।

मोहिंनी ज़मीन पर घोड़ी बनकर खड़ी हो गयी और अपने चेहरे को उसने विनय की गोद मे इस तरह रख दिया मानों वह उसके खड़े लण्ड को अपने चेहरे से सहला रही हो। विनय भी दरअसल यही चाहता था कि मोहिंनी का खूबसूरत चेहरा उसकी गोद मे रहे और जब वह मोहिंनी की स्पैकिंग करे तो जब जब मोहिंनी उछले तो उसका चेहरा उसके लण्ड पर रगड़ खाये।

विनय ने अब अपने हाथों से ही मोहिंनी की स्पैकिंग शुरू कर दी। मोहिंनी लगातार उछल रही थी और उसका चेहरा विनय के लण्ड पर रगड़ खाकर विनय की मौज़ करवा रहा था।

मोहिंनी से जितने मज़े विनय ले रहा था उतने मज़े तो उसके पति अजय ने भी नही लिए थे। विनय अब अपने क्लाइमैक्स पर पहुंचने वाला था। उसने अब मोहिंनी की स्पैकिंग बन्द करते हुए उससे कहा: अब तुम मेरे इस खड़े हो चुके लण्ड को अपने मुंह मे लेकर मुझे खुश करो।

नोट : इस तरह की कहानियों को वीडियो के रूप में देखने के लिए मेरे You Tube चैनल को इस लिंक पर देखें:

https://youtube.com/@hotindianbdsm

अब आगे की कहानी पढ़े:
मोहिंनी ने विनय के अंडरवियर में से उसके लण्ड को निकालकर उसे जल्दी से अपने मुंह मे ले लिया और उस पर अपनी जीभ फिराने लगी।

कुछ ही देर में विनय के लण्ड में से वीर्य की धार निकलकर मोहिंनी के मुंह मे जाने लगी और मोहिंनी उस सारे वीर्य को इस तरह से पी गई जिससे उसकी एक भी बूंद जमीन पर नही गिरी। विनय समझ गया था कि अजय ने मोहिंनी को लण्ड चूसने की बहुत बढ़िया ट्रेनिंग दी है।

मोहिंनी ने विनय के गीले लण्ड को अपनी जीभ से चाट चाट कर साफ भी कर दिया। विनय को मोहिंनी के साथ मौज़ मस्ती करते हुए लगभग आधा घण्टा हो चुका था और उसे लग रहा था कि अब अजय भी आने वाला होगा। लेकिन विनय का अभी मन नही भरा था और वह मोहिंनी के साथ और मस्ती करने के मूड में आ गया था।

विनय : चल अब कान पकड़कर मुर्गा बनकर दिखा।

मोहिंनी पूरी तरह निर्वस्त्र थी लेकिन विनय उसे लगातार ज़लील किये जा रहा था।

मोहिंनी गिड़गिड़ाने लगी: क्या मैं अब अपने कपड़े पहन सकती हूँ?

विनय ने चमड़े की बेल्ट का एक जोर का स्ट्रोक मोहिंनी के नितम्बों पर लगाते हुए कड़क आवाज़ में कहा: ऐसे ही नंगे बदन में मुर्गा बन साली। तेरा खूबसूरत बदन कपड़े पहनने के लिए नही बना है।

बेबस होकर मोहिंनी निर्वस्त्र अवस्था मे ही कान पकड़कर मुर्गा बनकर खड़ी हो गयी

इतनी देर में अचानक अजय भी वहाँ आ गया और उसने मोहिंनी को निर्वस्त्र हालत में मुर्गा बने देखा तो विनय से पूछने लगा: इस लौंडिया को मुर्गा बनने की सज़ा क्यों दी है विनय भाई। हमे भी तो बताओ।

विनय : खूबसूरत लड़कियों को ऐसे ही लौंडे पसंद होते हैं जो उन्हें पूरी दबंगई के साथ अपने काबू में रखते हैं। 

अजय हंसते हुए विनय के साथ ही सोफे पर बैठकर मोहिंनी को मुर्गा बने देखने लगा और विनय से पूछने लगा: और सुना तेरी माधुरी का क्या हालचाल है।

विनय : माधुरी भी मस्त माल है वैसे तो लेकिन साली यह मोहिंनी तो एकदम कयामत है। तेरी पसंद वाकई लाजबाब है। एक एक अंग एकदम तराशा हुआ है। क्या जबरदस्त सेक्सी फिगर है। इस लौंडिया को तो देखते ही लण्ड कड़क होने लगता है।

अजय अब मोहिंनी से कड़क आवाज़ में बोला: चल अब उठकर  इधर आकर खड़ी हो जा।

निर्वस्त्र मोहिंनी को बहुत ज्यादा शर्म आ रही थी। विनय और अजय सोफे पर बैठे हुए उसके जिस्म के बारे में ही जिस तरह से बातें कर रहे थे, उन्हें सुनकर उसका चेहरा शर्म और ज़लालत से एकदम लाल हो गया था।

मोहिंनी जैसे ही अजय के नजदीक आकर खड़ी हुई,अजय ने उसे हुक्म दिया: हम दोनों की जाँघों पर सीधी होकर लेट जा। अब हम दोनों तेरे इस मस्त संगमरमरी जिस्म को कुछ देर दबा सहलाकर मौज़ मस्ती करेंगे।

विनय और अजय सोफे पर एक साथ ही बैठे हुए थे। मोहिंनी एकदम निर्वस्त्र थी। वह यह भी समझ रही थी कि उसका पति अपने दोस्त विनय के साथ मिलकर उसे एक खिलौने की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन वह बेबस थी। वह उन दोनों की जाँघों के ऊपर सीधी लेट गई। उसका चेहरा अजय की जांघ पर टिका हुआ था और उसकी जाँघे और पैर विनय की गोद मे रखे हुए थे।  

अजय अपने हाथों से मोहिंनी के मस्त उरोजों औऱ चिकने पेट को दबाने सहलाने लगा। उधर विनय मोहिंनी की चिकनी जाँघों पर हाथ फिराए जा रहा था।जाँघों को सहलाते सहलाते विनय के हाथ मोहिंनी के योनि प्रदेश को भी दबाने थपथपाने लगे। मोहिंनी अजय और विनय दोनों के हाथ मे एक सेक्स टॉय बनकर रह गयी थी।

अचानक अजय ने मोहिंनी के गाल पर एक चपत लगाते हुए कहा: मुंह खोल अपना।

मोहिंनी ने जैसे ही मुंह खोला,अजय ने उसके मुंह मे थूकते हुए कहा: बता मेरे इस थूक का स्वाद तुझे कैसा लगा?

मोहिंनी समझ गयी कि अगर वह कहेगी कि थूक का स्वाद अच्छा लगा तो उसके मुंह में विनय भी थूकेगा। इसलिए वह कहने लगी: यह सब मत करो। यह मुझे अच्छा नही लग रहा है।मेरे मुंह मे मत थूको।

विनय अजय से कहने लगा: इस लौंडिया की इतनी हिम्मत हो गयी कि यह जुबान चलाने लगी है। लगता है इसे सख्त सज़ा की जरूरत है।

अजय : अभी इस साली का इलाज करता हूँ। चल खड़ी हो जा।

मोहिंनी डरी सहमी सी अजय के सामने सर झुकाकर खड़ी हो गयी।

अजय : जमीन पर बैठकर घोड़ी बन जा और चलती हुई मेरी तरफ आ।

मोहिंनी घोड़ी बनकर अजय के पास आ गयी। अजय ने उसके दोनों गालों पर चपत लगाते हुए उसके चेहरे को पकड़कर अपनी गोद मे अपने लण्ड के ऊपर रखवाया और फिर कड़क आवाज़ में उससे बोला: जब तक मेरा हुक्म न मिले, 
तेरा चेहरा इसी जगह टिका रहना चाहिए।

अजय ने अंडरवियर पहना हुआ था और उसके अंदर उसका लण्ड एकदम तनकर खड़ा हो चुका था। मोहिंनी का पूरा चेहरा अब अजय के अंडरवियर के ऊपर टिककर उसके लण्ड की मालिश करने वाला था।

विनय यह सब देखकर कहाँ चुप बैठने वाला था। वह अजय से बोला: यार तू इस लौंडिया के चेहरे को अपने दोनों हाथों में पकड़कर उसे अपने अंडरवियर पर टिकाकर रख। बाकी की मौज़ की गारंटी मैं लेता हूँ।

यह कहने के साथ ही विनय सोफे से उठकर खड़ा हो गया औऱ अपनी पैंट में से चमड़े की बेल्ट निकलकर उसके स्ट्रोक उसने मोहिंनी के नितम्बों पर मारने शुरु कर दिए।

विनय हंसता हुआ अजय से बोला: बेल्ट के हर स्ट्रोक पर यह लौंडिया उछलेगी और इसका इसका खूबसूरत चेहरा तेरे लण्ड की मालिश करेगा। इसकी सज़ा में तुझे ऐसा मज़ा आएगा कि तू हमेशा याद रखेगा।

विनय लगातार मोहिंनी के नितम्बों की बेल्ट स्पैकिंग कर रहा था और मोहिंनी का चेहरा अजय की गोद मे उसके अंडरवियर के ऊपर मानो एक सेक्सी डांस कर रहा था।


मोहिंनी जिस तरह से अपने चेहरे से उसके लण्ड की मालिश कर रही थी, उससे अजय को मानों जन्नत का मज़ा आ रहा था। कुछ ही देर में उसके लण्ड से वीर्य निकलकर बहने लगा। 

अजय ने अब अपना अंडरवेअर थोड़ा सा नीचे खिसकाते हुए अपने गीले लण्ड को मोहिंनी के मुंह मे डालते हुए कहा: चल इसका सारा जूस पीकर इसे चाट चाट कर साफ कर।

मोहिंनी ने अजय के गीले लण्ड को अपने मुंह मे ले लिया और उस पर अपनी जीभ फिराने लगी।

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